राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ रहीं दूरियां? जानें क्या है गठबंधन की मजबूरी

यूपी तक

• 03:20 PM • 08 Oct 2026

Uttar Pradesh Politics: राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच बढ़ती दूरी से कांग्रेस-सपा गठबंधन को लेकर सवाल उठ रहे हैं. प्रदर्शनों में अलग-अलग दिखने और सीट बंटवारे पर मतभेद के बीच दोनों दलों के सामने गठबंधन मजबूत रखने की चुनौती है.

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Uttar Pradesh Politics: राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच बढ़ती दूरियों ने राजनीतिक गलियारों में नए सवालों को जन्म दे दिया है. हाल ही के प्रदर्शनों और अहम बैठकों में दोनों नेताओं का अलग-अलग दिखाई देना, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन की चुनौतियों को दर्शाता है. दोनों पार्टियों के बीच आपसी मतभेद और सीटों के बंटवारे की असहमति इस पूरी स्थिति को और भी ज्यादा उलझा रही है.

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अलग नजर आए राहुल और अखिलेश

दिल्ली में 6 और 7 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों में राहुल गांधी और अखिलेश यादव अलग-अलग दिखाई दिए. इसके अलावा कांग्रेस ने 'सागर रत्ना' में एक लंच रखा था, जिसमें समाजवादी पार्टी का कोई भी नेता नहीं पहुंचा. इन घटनाओं से यह साफ लगता है कि कांग्रेस अपना पूरा ध्यान राहुल गांधी पर रखना चाहती है, जबकि अखिलेश यादव भी अपनी एक अलग पहचान और छवि बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं.

सीट बंटवारे और रणनीति पर मतभेद

समाजवादी पार्टी के सूत्रों के अनुसार, दोनों पार्टियों का लक्ष्य एक ही है, लेकिन काम करने के तरीके और रणनीतियों में काफी मतभेद हैं. कांग्रेस को इस बात का डर है कि अखिलेश यादव के साथ होने से मीडिया का ध्यान राहुल गांधी से हट सकता है. वहीं, उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे को लेकर भी दोनों पार्टियों में असहमति साफ दिखाई दे रही है. इन सब बातों से गठबंधन की मजबूरियां खुलकर सामने आ रही हैं.

गठबंधन के लिए दूरी बनी चुनौती

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दोनों नेताओं के बीच की यह दूरी गठबंधन के लिए चिंता का एक बड़ा विषय है. भले ही दोनों पार्टियां साथ मिलकर चुनाव लड़ने का दावा करती हैं, लेकिन आपसी बातचीत और सही सहयोग की कमी से गठबंधन की मजबूती पर बुरा असर पड़ सकता है. भविष्य में इस गठबंधन को सही दिशा में ले जाने के लिए दोनों दलों को नई रणनीति बनाने और आपस में संवाद बढ़ाने की बहुत जरूरत होगी.