ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामिनेई के अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में मारे जाने की खबर के बाद उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भारी विरोध प्रदर्शन और शोक का माहौल है. इस घटना ने न केवल शिया समुदाय बल्कि सुन्नी समुदाय को भी झकझोर कर रख दिया है. खामिनेई की मौत की खबर के बाद यूपी के विभिन्न जिलों में शिया समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए हैं. लोग काले कपड़े पहनकर और काले झंडे लहराकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं.
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प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल को 'गद्दार' और 'धोखेबाज' करार देते हुए कड़ी नाराजगी जताई है. शिया समुदाय खामिनेई को अपना 'रहबर' (नेता) और 'इमाम' मानता है. शिया धर्मगुरुओं और आम लोगों ने इसे एक कायरतापूर्ण हमला बताया है और खामिनेई को एक 'शेर' की संज्ञा दी है जो हमेशा उनके दिलों में जिंदा रहेंगे.
इस बीच सुन्नी समुदाय के प्रमुख धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने भी इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है. उन्होंने कहा कि ईरान एक स्वतंत्र और संप्रभु देश है और उस पर इस तरह का हमला अंतरराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ाने जैसा है. मौलाना ने दुख जताया कि रमजान जैसे पवित्र महीने में इस तरह की जंग और हमले किए गए, जो कि बेहद चिंताजनक है.
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप करने और इस मामले को इंटरनेशनल कोर्ट में ले जाने की अपील की है ताकि कसूरवारों को सजा मिल सके. मौलाना फिरंगी महली ने देश के सभी नागरिकों से शांति और अमन-चैन बनाए रखने की अपील की है.
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