EX IAS दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री के ऐलान के बाद ही ओपी राजभर बोले- पैसा कमा ली होंगी

यूपी तक

• 01:23 PM • 29 Sep 2026

दिव्या मित्तल ने IAS से इस्तीफा दिया और राजनीति में कदम रखा. वे लोगों की आवाज़ बनना चाहती हैं और प्रशासनिक सुधार पर जोर देती हैं.

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पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफे के बाद आखिरकार अपने भविष्य की राह साफ कर दी है. कई दिनों से जारी कयासों पर विराम लगाते हुए 2013 बैच की पूर्व तेजतर्रार आईएएस अधिकारी ने एक भावुक वीडियो संदेश जारी कर राजनीति में एंट्री का आधिकारिक ऐलान कर दिया है. दिव्या मित्तल ने साफ किया है कि वह किसी भी मौजूदा राजनीतिक दल में शामिल होने के बजाय आम जनता, शिक्षकों, डॉक्टरों, किसानों और छात्रों को साथ लेकर एक 'नई राजनीति' की नींव रखना चाहती हैं. वहीं उनके इस फैसले पर सुभासपा अध्यक्ष और यूपी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर का तीखा तंज सामने आया है जिसमें उन्होंने कहा कि 'आईएएस बनना आसान है. लेकिन एमएलए बनना बहुत कठिन.'

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मुझे पद नहीं, लोगों की आवाज बनना है- दिव्या मित्तल

आईएएस के पद से इस्तीफा देने के बाद दिव्या मित्तल के टीचिंग/कोचिंग से जुड़ने, विदेश बसने या राजनीति में आने को लेकर लगातार चर्चाएं थीं. दिव्या मित्तल ने वीडियो जारी कर इन सभी सवालों का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि लोगों ने उनसे पूछा कि अब आगे क्या बनना है तो उनका जवाब था 'मुझे उन लोगों की आवाज बनना है, जिनकी आवाज सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पाती और अगर पहुंच भी जाए तो सुनी नहीं जाती.'

वीडियो में उन्होंने अपने मिर्जापुर कार्यकाल के दौरान लहरीयादह की पहाड़ी का जिक्र किया जहां पानी की चेकिंग के दौरान एक महिला ने उनसे पांचवीं से आगे के स्कूल की मांग की थी. दिव्या मित्तल ने कहा कि नियम, पैसे और स्वीकृतियां होने के बावजूद सिर्फ प्रशासनिक इरादे और फिक्र की कमी के कारण योजनाएं रुकी रहती हैं. उन्होंने पेपर लीक से परेशान युवाओं, बदहाल सड़कों और सरकारी दफ्तरों में होने वाली देरी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वह जनता के साथ मिलकर व्यवस्था का हिसाब मांगना चाहती हैं.

किसी पार्टी में शामिल नहीं होंगी, जनता से मांगी 'नई राजनीति' की मदद

अखिलेश यादव (सपा) और अजय राय (कांग्रेस) जैसे प्रमुख नेताओं द्वारा उनके इस्तीफे को लेकर दिए गए बयानों के बीच दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल किसी भी स्थापित राजनीतिक दल का हिस्सा नहीं बनेंगी.  दिव्या मित्तल ने अपनी राजनीति के लिए चार शब्दों का इस्तेमाल किया 'इरादा, न्याय, फिक्र और सोच'.

उन्होंने कहा कि केवल एक व्यक्ति राजनीति नहीं बदल सकता. उन्होंने डॉक्टर, शिक्षक, किसान, मजदूर, छात्र और महिलाओं से एक साथ आकर एक नई व्यवस्था का ढांचा तैयार करने की अपील की. इसके लिए उन्होंने एक व्हाट्सएप नंबर भी जारी किया है ताकि लोग सीधे उनसे जुड़कर अपने सुझाव दे सकें.

मंत्री ओपी राजभर का तंज

दिव्या मित्तल के राजनीति में आने के ऐलान के तुरंत बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं. यूपी सरकार में मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने दिव्या मित्तल के इस फैसले पर चुटकी लेते हुए कहा 'देखिए पैसा-वैसा कमा लिया होगा. अब राजनीति में सोच रहे होंगे कि जल्दी एमएलए बन जाएं. आईएएस बनना आसान है, लेकिन एमएलए बनना बहुत कठिन है. एक-एक आदमी के आगे हाथ जोड़ना पड़ता है, गोड़ (पैर) जोड़ना पड़ता है, बातें सुननी पड़ती हैं और उनका काम करना पड़ता है. आईएएस बनकर तो बस आसानी है, लेकिन एमएलए बनना बहुत कठिन है."

आईआईटी-आईआईएम से आईएएस और अब राजनीति तक का सफर

शानदार शैक्षणिक और प्रशासनिक रिकॉर्ड: दिव्या मित्तल ने आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बैंगलोर से पढ़ाई की. लंदन में नौकरी करने के बाद वह भारत लौटीं और यूपीएससी क्रैक कर 2013 बैच की यूपी कैडर की आईएएस बनीं. उन्होंने यूपी के कई जिलों में बतौर जिलाधिकारी (DM) अपनी सेवाएं दीं.

उन्होंने 30 अगस्त को निजी कारणों और पारिवारिक प्राथमिकताओं का हवाला देकर अपने पद से इस्तीफा दिया था जो सितंबर से प्रभावी हो गया. आगामी विधानसभा चुनावों से पहले दिव्या मित्तल का यह फैसला प्रदेश की सियासत में चर्चा का केंद्र बन गया है. अब देखना यह होगा कि किसी राजनीतिक दल के बिना 'नई राजनीति' गढ़ने का उनका यह प्रयोग धरातल पर कितना असर दिखा पाता है.