उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले का एक वीडियो खूब चर्चा में बना रहा. फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज में समाजवादी छात्र सभा के सदस्यता अभियान के दौरान हुए विवाद में रायबरेली के शहर कोतवाल शिव शंकर सिंह और सपा नेताओं के बीच तीखी बहस हो गई. बहस के दौरान कोतवाल के मुंह से निकले "चूड़ी पहनो", "घर पर बैठो" और "औकात में रहकर बात करो" जैसे शब्दों ने इस झड़प को पुलिस बनाम सपा की सियासी जंग में बदल दिया. सपा जिला अध्यक्ष और विधायकों ने एसपी दफ्तर पहुंचकर घेराव किया. वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को 'पीडीए' पर प्रहार बताते हुए बीजेपी सरकार को आड़े हाथों लिया है. इस पूरे सियासी घमासान के केंद्र में आए शहर कोतवाल शिव शंकर सिंह कौन हैं और उनका 24 साल का पुलिस करियर कैसा रहा है, आइए विस्तार से जानते हैं.
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जानिए क्या है पूरा मामला
घटना रायबरेली के फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज की है जहां समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ता 'पीडीए' का बैनर लगाकर छात्र सदस्यता अभियान चला रहे थे. ABVP कार्यकर्ताओं ने इस अभियान का विरोध किया जिसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी, नारेबाजी और धक्कामुक्की शुरू हो गई. ABVP कार्यकर्ताओं ने कॉलेज का गेट अंदर से बंद कर धरना शुरू कर दिया जबकि सपा कार्यकर्ता बाहर प्रदर्शन करने लगे.
कोतवाल की एंट्री और तीखी बहस
स्थिति संभालने पहुंचे शहर कोतवाली प्रभारी शिव शंकर सिंह ने सपा कार्यकर्ताओं को हटाने की कोशिश की. इसी दौरान सपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव और कोतवाल के बीच तीखी नोकझोंक हो गई जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
अखिलेश यादव का हमला और PDA का सियासी नैरेटिव
वीडियो वायरल होने के बाद सपा के हरचंदपुर विधायक राहुल लोधी और बछरावां विधायक श्याम सुंदर भारती कार्यकर्ताओं संग एसपी दफ्तर पहुंचे और कोतवाल को हटाने की मांग की. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को सीधे 'पीडीए' की राजनीति से जोड़ते हुए सोशल मीडिया पर लिखा 'रायबरेली में पीडीए समाज पर किया गया यह प्रहार बेहद अपमानजनक एवं निंदनीय है. पुलिस के दमन के बावजूद छात्र सभा के युवा जागरूक करने में सफल रहे. पीडीए समाज में अब नई चेतना जागी है और जनता इसका जवाब अपनी सरकार बनाकर देगी.'
सपा की ओर से पुलिस पर 'जातीय पक्षपात' और 'वर्दी की हनक' दिखाने का आरोप लगाया जा रहा है जिसकी तुलना पिछले दिनों मैनपुरी के सीओ अशोक सिंह वाले मामले से भी की जा रही है.
कौन हैं शहर कोतवाल शिव शंकर सिंह?
अचानक विवादों और सुर्खियों में आए शहर कोतवाली प्रभारी शिव शंकर सिंह का पुलिस विभाग में करीब ढाई दशक का लंबा अनुभव रहा है.
मायावती से लेकर अखिलेश और योगी सरकार तक का सफर
शिव शंकर सिंह का पुलिस करियर अलग-अलग सरकारों में प्रमुख थानों की जिम्मेदारी संभालने के लिए जाना जाता है.
बसपा शासन (2007–2012): आजमगढ़ जिले के अलग-अलग थानों में लगातार 5 साल तक थाना प्रभारी के रूप में कार्यरत रहे.
सपा शासन (2012–2019): सत्ता परिवर्तन के बाद उनका तबादला राजधानी लखनऊ हुआ. लखनऊ के महानगर, जानकीपुरम और विकास नगर जैसे वीआईपी थानों में करीब 7 साल तक प्रभारी रहे.
हरदोई व रायबरेली पोस्टिंग (2019 से अब तक): 2019 में हरदोई के बेनीगंज, मल्लावां, शाहाबाद और बिलग्राम थानों में तैनाती रही. 2021 में रायबरेली ट्रांसफर हुआ जहां ऊंचाहार, लालगंज, सरेनी और सलोन के बाद 20 सितंबर 2025 को उन्हें शहर कोतवाली की कमान सौंपी गई.
2001 में सब-इंस्पेक्टर से शुरू हुआ उनका सफर आज 24 साल बाद रायबरेली के सबसे अहम थाने की कोतवाली तक पहुंचा है. हालांकि अब किसी केस की जांच के बजाय एक वायरल वीडियो और राजनीतिक बयानों के चलते उनकी खाकी हनक और कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है.
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