उत्तर प्रदेश में ITI अनुदेशकों (टीचरों) की भर्ती प्रक्रिया पिछले कई सालों से लटकी हुई है. 2014, 2015 और 2016 की पुरानी भर्तियों के इंटरव्यू तक अभी तक पूरी तरह संपन्न नहीं हो सके हैं. वहीं 2022 के बाद से कोई स्थायी भर्ती नहीं आई है. प्रदेश भर से आए आईटीआई अनुदेशक अभ्यर्थियों ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं और स्थायी भर्ती की मांग उठाई. अभ्यर्थियों का आरोप है कि 6-7 साल पढ़ाई और 3-3 साल के अनुभव के बावजूद सरकार उन्हें सिर्फ आउटसोर्सिंग का रास्ता दिखा रही है. जबकि सरकारी आईटीआई कॉलेजों में अनुदेशकों के 5000 से अधिक पद खाली पड़े हैं.
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10 साल से अटकी पुरानी भर्तियां
अभ्यर्थियों का कहना है कि 2014, 2015 और 2016 में आईटीआई अनुदेशकों के पदों पर भर्तियां निकाली गई थीं. लेकिन 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद से इंटरव्यू की प्रक्रिया बेहद सुस्त हो गई. 10 साल बीत जाने के बाद भी 2015 और 2016 की भर्तियों के इंटरव्यू और चयन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है. इसके अलावा 2022 में आई भर्ती में PET, CITS और 3 साल के अनुभव की ऐसी शर्तें लगा दी गईं कि बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थी बाहर हो गए या फॉर्म ही नहीं भर सके.
योग्यता है पर नौकरी नहीं आउटसोर्सिंग के भरोसे व्यवस्था
अखिलेश यादव से मुलाकात करने पहुंचे अभ्यर्थियों ने बताया कि सीआईटीएस (CITS) ऐसा डिप्लोमा/प्रमाणपत्र है जिससे व्यक्ति केवल आईटीआई इंस्ट्रक्टर ही बन सकता है. इसमें 6-7 साल गंवाने के बाद भी स्थायी नौकरी नहीं मिल रही है. स्थायी भर्ती के बजाय सरकार ₹23,500 के मानदेय पर आउटसोर्सिंग से काम चला रही है जिससे युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं है.'
शिक्षकों की भारी कमी
प्रदेश के सरकारी आईटीआई सेंटरों में शिक्षकों की इतनी कमी है कि एक-एक अनुदेशक को दो-दो ट्रेड या विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं. शिक्षकों के अभाव में कई ट्रेड बंद होने की नौबत आ गई है.
अखिलेश यादव का सरकार पर हमला
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात के दौरान पार्टी नेताओं ने बीजेपी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। सपा का कहना है कि 'सरकार की मंशा युवाओं को रोजगार देने की नहीं है. जानबूझकर परीक्षाओं और इंटरव्यू को पेंडिंग रखा जा रहा है.'
एक तरफ सरकार युवाओं को 'स्किल्ड' (कुशल) बनाने की बात करती है. वहीं दूसरी तरफ सीआईटीएस जैसे स्किल सर्टिफाइड और 3 साल के अनुभवी युवाओं को दर-दर भटकने पर मजबूर किया जा रहा है. सपा नेतृत्व ने भरोसा दिलाया कि आगामी समय में पेंडिंग भर्तियों को पूरा कराना और खाली पड़े 5,000+ पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू कराना उनकी प्राथमिकता रहेगी.
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