कौन होते हैं वनटांगियां समाज के लोग, जिनके साथ CM योगी आदित्यनाथ मनाते हैं दिवाली का त्योहार? जानिए इनका इतिहास

अभय राठौर

08 Nov 2026 (अपडेटेड: 08 Nov 2026, 04:19 PM)

सीएम योगी आदित्यनाथ पिछले दस सालों से गोरखपुर के वनटांगिया परिवारों के साथ दिवाली मना रहे हैं. ब्रिटिश काल में जंगलों में पेड़ लगाने और खेती करने के काम से जुड़े इन लोगों को आजादी के बाद भी लंबे समय तक बुनियादी सुविधाएं और अधिकार नहीं मिले थे.

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिछले कई सालों से गोरखपुर के वनटांगिया परिवारों के साथ दीपावली का त्योहार मनाते आ रहे हैं. उन्होंने इसके पीछे की वजह बताते हुए कहा है कि वनटांगिया समाज के लोग आजादी के लंबे समय बाद तक अपने बुनियादी अधिकारों और सरकारी सुविधाओं से दूर रहे हैं. योगी ने बताया है कि करीब 120 से 130 साल पहले जब इन परिवारों को जिस जमीन पर बसाया गया था, उस जमीन को लंबे समय तक राजस्व गांव का दर्जा तक नहीं दिया गया था.

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इसके बाद जब यूपी में CM योगी के नेतृत्व वाली बीजेपी की सरकार आई तो उन्होंने वनटांगिया गांवों को राजस्व गांव का दर्जा दिया. इसके साथ ही उन्होंने वनटांगिया परिवारों तक सभी मूलभूत सुविधाओं पहुंचाईं और उनके नाम मतदाता सूची में भी दर्ज करवाए. आइए जानते हैं कौन होते हैं वनटांगिया समाज के लोग?

पिछले दस साल से साथ मना रहे दिवाली

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि वनटांगिया समाज के साथ उनका जुड़ाव मुख्यमंत्री बनने के बाद शुरू नहीं हुआ था. वह पहले भी लगातार इन परिवारों के बीच जाते रहते थे. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद से पिछले दस सालों से वह हर दीपावली वनटांगिया परिवारों के साथ ही मनाते आ रहे हैं.

योगी ने बताया कि करीब 120 से 130 साल पहले वनटांगिया परिवारों को कुछ जमीनों पर बसाया गया था. लंबे समय तक इन बस्तियों को राजस्व गांव का दर्जा नहीं मिला. इस वजह से वहां रहने वाले लोगों को कई बुनियादी अधिकार और सरकारी सुविधाएं नहीं मिल पाती थीं.

वनटांगिया गांवों को मिला राजस्व दर्जा

सीएम योगी ने बताया है कि वनटांगिया परिवारों को उनका अधिकार दिलाने के लिए बीजेपी की सरकार ने उनके गांवों को राजस्व गांव का दर्जा दिलाया. इसके साथ ही इन परिवारों के लोगों के नाम मतदाता सूची में भी दर्ज करवाए. जिससे उन्हें अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अधिकार मिला.

मुख्यमंत्री ने बताया कि वनटांगिया समाज के लोगों को राशन कार्ड और दूसरी सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिलाया गया. इस तरह लंबे समय से सुविधाओं से दूर रहे परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ा गया.

अंतिम व्यक्ति तक खुशियां पहुंचाना मकसद

पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि पहले की सरकारों ने वनटांगिया समाज के लोगों की परेशानियों को नहीं समझा था. उन्होंने कहा है कि इन परिवारों के बीच जाकर दिवाली मनाने का उनका मकसद समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक खुशियां, अधिकार और सम्मान पहुंचाना है.

योगी ने यह भी बताया कि वनटांगिया समाज के साथ उनका रिश्ता सिर्फ मुख्यमंत्री के रूप में नहीं है. वह पहले भी लगातार इन परिवारों के बीच जाते रहे हैं. उन्होंने कहा है कि वनटांगिया समाज के बीच उनका यह लगभग 19वां या 20वां कार्यक्रम है.

कौन होते हैं वनटांगिया समाज के लोग?

वनटांगिया समाज के लोग मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और महाराजगंज जिले के जंगलों में बसे हुए हैं. ब्रिटिश शासन के दौरान जब रेलवे लाइन बिछाने के लिए साखू के पेड़ों की कटाई की गई, तब उनकी भरपाई के लिए म्यांमार की 'टांगिया विधि' से नए पौधे लगाए गए. इस विधि में लोग जंगलों में रहकर खेती करने के साथ पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने का काम करते थे. इसी काम से जुड़े लोगों को वनटांगिया कहते हैं. 

'टांगिया' शब्द बर्मी भाषा से आया है, जिसमें 'टांग' का अर्थ पहाड़ और 'या' का अर्थ खेती करना होता है. देश को 1947 में आजादी मिलने के बाद भी वनटांगिया समाज के लोगों को कई दशकों तक नागरिकता का अधिकार, पक्की जमीन, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिली थी. इनके गांवों को वन ग्राम घोषित किया गया था, इसलिए इन्हें सामान्य राजस्व गांवों को मिलने वाली सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाता था. 

जब उत्तर प्रदेश में  बाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार आई तो उनके प्रयासों से इन गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा दिया गया. इसके बाद वनटांगिया परिवारों को पक्के मकान, बिजली, पानी, सड़क, राशन कार्ड और दूसरी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने लगा.

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