उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले ब्यूरोक्रेसी छोड़ राजनीति का मैदान चुनने वाले अधिकारियों की सूची में एक और बड़ा नाम लगभग तय माना जा रहा है. जीएसटी (GST) की डिप्टी कमिश्नर अनुपमा सरोज का स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) आवेदन मंजूर हो गया है. वीआरएस की मंजूरी मिलते ही उनके सक्रिय राजनीति में उतरने और आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं. पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे और अपनी नई पार्टी के ऐलान के बाद अनुपमा सरोज के इस कदम ने प्रदेश के सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है. चर्चा है कि अनुपमा सरोज सीतापुर जिले की सुरक्षित सिधौली विधानसभा सीट से चुनावी ताल ठोक सकती हैं.
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मजबूत सियासी बैकग्राउंड और सिधौली सीट से दावेदारी
अनुपमा सरोज का एक बेहद मजबूत और स्थापित राजनीतिक पृष्ठभूमि से नाता है. वह समाजवादी पार्टी की पूर्व सांसद सुशीला सरोज की बेटी हैं. इसके अलावा वह समाजवादी पार्टी के प्रमुख और मुखर राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुराग भदौरिया की पत्नी हैं. प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ मजबूत राजनीतिक परिवार से जुड़े होने के कारण सीतापुर की अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सिधौली विधानसभा सीट पर उनकी दावेदारी को बेहद मजबूत माना जा रहा है. वीआरएस मंजूर होने के बाद से ही क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है.
दिव्या मित्तल का इस्तीफा और 'जननीति भारत' का ऐलान
अनुपमा सरोज से ठीक पहले उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल का इस्तीफा भी केंद्र सरकार द्वारा स्वीकार किया गया था. 13 साल की नौकरी को अलविदा कहने के बाद पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल ने किसी स्थापित राजनीतिक दल में जाने के बजाय 'जननीति भारत' नाम से एक नए राजनीतिक मंच का गठन किया है.
403 सीटों पर चुनाव लड़ने का लक्ष्य
मिर्जापुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिव्या मित्तल ने अपनी नई पार्टी की रणनीति का खुलासा किया था. उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनकी पार्टी 'जननीति भारत' आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाएगी और अगर मजबूत प्रत्याशी मिलते हैं तो प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी.
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