UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 6 जनवरी को हुई कैबिनेट बैठक में आईआईएमटी (IIMT) विश्वविद्यालय, मेरठ को लेकर एक बड़ा फैसला लिया गया है. अब यह विश्वविद्यालय ग्रेटर नोएडा में अपना ऑफ-कैंपस संचालित कर सकेगा. सरकार ने इसके लिए प्राधिकार पत्र (LOP) जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.
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इस फैसले की ये हैं मुख्य बातें-
इस निर्णय से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए अब और भी बेहतर विकल्प मिलेंगे. 'एसोसिएशन ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज' (प्रायोजक संस्था) ने ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में इसके लिए 4.796 एकड़ भूमि चिन्हित की है. यह मंजूरी 'उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019' और 2021 के संशोधन के तहत दी गई है जो विश्वविद्यालयों को अपने मुख्य परिसर से दूर केंद्र स्थापित करने की अनुमति देता है. इस प्रोजेक्ट के लिए 25 फरवरी 2025 को आशय पत्र (LOI) जारी किया गया था, जिसे अब कैबिनेट ने अंतिम स्वीकृति दे दी है.
लिया गया JS विश्वविद्यालय को बंद करने का फैसला
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के अनुसार, जांच में बेहद गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं. यूनिवर्सिटी ने नियमों को ताक पर रखकर बीपीएड (BP.Ed) कोर्स की फर्जी और बैक डेट (पुरानी तारीख) में मार्कशीट और डिग्रियां बांटीं. इन फर्जी डिग्रियों का इस्तेमाल राजस्थान की शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती-2022 में किया गया. इस मामले में राजस्थान पुलिस की जांच के बाद यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति और कुलसचिव को गिरफ्तार भी किया गया. यूनिवर्सिटी ने न तो जमीन के मानकों का पालन किया और न ही उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद को जरूरी विवरण दिए. इसे एक संगठित अपराध माना गया है.
अब आगे क्या होगा?
यूनिवर्सिटी बंद होने के बाद इसके सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के पास जमा कर दिए जाएंगे. पुराने छात्रों की मार्कशीट और डिग्रियों का वेरिफिकेशन अब आगरा यूनिवर्सिटी के पास रखे गए उन्हीं रिकॉर्ड्स के आधार पर होगा. जब तक बंद करने की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक यूनिवर्सिटी के कामकाज को संभालने के लिए सरकार ने तीन सदस्यों की एक कमेटी बना दी है.
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