उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अब प्रदेश की समृद्ध और विविध खाद्य संस्कृति को दुनिया के नक्शे पर नई पहचान दिलाने के लिए एक मास्टर प्लान पर काम कर रही है. वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट (ODOP) की अपार सफलता के बाद अब सरकार वन डिस्ट्रिक्ट-वन क्यूजीन (ODOC) मॉडल के जरिए प्रदेश की खाद्य अर्थव्यवस्था को बदलने की तैयारी में है. इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत उत्तर प्रदेश के सभी 18 मंडलों को क्यूजीन क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा. यह पहल न सिर्फ यूपी के पारंपरिक स्वादों को सहेजने का काम करेगी बल्कि इसे आर्थिक विकास, निवेश और रोजगार के एक बड़े इंजन में बदल देगी. आइए विस्तार से समझते हैं कि यह क्यूजीन क्लस्टर मॉडल क्या है और यह आम आदमी से लेकर उद्यमियों तक की जिंदगी को कैसे प्रभावित करेगा.
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क्या है क्यूजीन क्लस्टर मॉडल?
सरल शब्दों में कहें तो क्यूजीन क्लस्टर एक ऐसा संगठित ढांचा होगा जहां किसी विशेष क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजनों को एक ही प्लेटफॉर्म पर पहचान, बेहतर बाजार और आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी. 4 जनवरी को जारी आधिकारिक प्रस्ताव के अनुसार सभी मंडल के जनपदों में मिलने वाले विशिष्ट व्यंजनों को चिन्हित किया जाएगा. इन व्यंजनों को आधुनिक बाजार की जरूरतों के हिसाब से उनकी गुणवत्ता, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर काम किया जाएगा ताकि वे सिर्फ गलियों की दुकानों तक सीमित न रहकर ई-कॉमर्स और फाइव-स्टार होटलों तक पहुंच सकें.
आगरा का पेठा और गोरखपुर का लिट्टी-चोखा बनेगा इंटरनेशनल ब्रांड
इस योजना का सबसे बड़ा असर यूपी के स्थानीय स्वादों की ब्रांडिंग पर पड़ेगा. अब आगरा का मशहूर पेठा, मथुरा का पेड़ा, गोरखपुर का लिट्टी-चोखा, कानपुर का समोसा और विभिन्न जनपदों के लजीज लड्डू केवल स्थानीय पहचान तक सीमित नहीं रहेंगे. सरकार इन्हें फूड ब्रांड के रूप में स्थापित करेगी. इन उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स, बड़े फूड फेस्टिवल्स और प्रमुख पर्यटन स्थलों के माध्यम से देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाया जाएगा. इससे उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत आधुनिक बाजार से सीधे जुड़ जाएगी.
आम जनता और युवाओं की जिंदगी पर क्या पड़ेगा असर?
यह योजना केवल स्वाद तक सीमित नहीं है बल्कि इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव बहुत गहरे होने वाले हैं:
1. रोजगार के नए अवसर: क्लस्टर विकसित होने से स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं और महिलाओं को काम मिलेगा. फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में नए जॉब्स पैदा होंगे.
2. उद्यमिता को बढ़ावा: सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुसार, यह मॉडल फूड स्टार्टअप्स और एमएसएमई (MSME) के लिए संजीवनी का काम करेगा. युवाओं को अपना फूड बिजनेस शुरू करने के लिए सरकार से तकनीकी और मार्केटिंग सहायता मिलेगी.
3. फूड टूरिज्म: उत्तर प्रदेश अब एक 'फूड डेस्टिनेशन' के रूप में उभरेगा. पर्यटक केवल मंदिर या ऐतिहासिक इमारतें देखने नहीं, बल्कि वहां के खास जायके का अनुभव लेने भी आएंगे. रेलवे स्टेशनों, एयरपोर्ट्स और हाईवे पर मिलने वाले खाने की गुणवत्ता और वैरायटी में बड़ा सुधार दिखेगा.
आधुनिक सुविधाओं और निवेश का जाल
योगी सरकार इस पहल को धरातल पर उतारने के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का सहारा ले रही है. प्रस्ताव के अनुसार, क्यूजीन क्लस्टर्स में निम्नलिखित सुविधाएं विकसित की जाएंगी:
⦁ क्वालिटी टेस्टिंग और FSSAI सपोर्ट: स्थानीय उत्पादकों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों (FSSAI) के अनुरूप तैयार किया जाएगा.
⦁ कोल्ड चेन और लॉजिस्टिक्स: खराब होने वाले खाद्य पदार्थों के लिए कोल्ड स्टोरेज और बेहतर ट्रांसपोर्ट की सुविधा दी जाएगी.
⦁ ट्रेनिंग और स्किलिंग: स्थानीय कारीगरों को आधुनिक पैकेजिंग और हाइजीन की ट्रेनिंग दी जाएगी.
आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की ओर एक बड़ा कदम
यह पहल न केवल प्रदेश के पारंपरिक स्वाद को नई पहचान देगी बल्कि आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के विजन को भी मजबूती प्रदान करेगी. सरकार की प्रो-इंडस्ट्री नीति और सिंगल विंडो सिस्टम के कारण फूड सेक्टर में भारी निवेश की उम्मीद है. जब आगरा के पेठे की मांग लंदन में होगी या गोरखपुर के लिट्टी-चोखे का ऑर्डर अमेरिका से आएगा, तो इसका सीधा लाभ उत्तर प्रदेश के किसान और छोटे हलवाइयों को मिलेगा. कुल मिलाकर वन डिस्ट्रिक्ट-वन क्यूजीन के जरिए उत्तर प्रदेश अपनी थाली के जायके को दुनिया भर की मेज तक पहुंचाने के लिए तैयार है, जो आने वाले समय में प्रदेश की जीडीपी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
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