यूपी में SIR के बाद काटे जा सकते हैं 2.89 करोड़ वोटर्स के नाम, अब 6 फरवरी तक किया जाएगा ये जरूरी काम

यूपी में एसआईआर प्रक्रिया के बाद करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम लिस्ट से हटाए जा सकते हैं. यह ऐसे वोटर्स हैं जो या तो स्थानांतरित हो चुके हैं, या उनकी मौत हो चुकी है. या फिर जब SIR की प्रक्रिया चल रही थी तब वे मौके पर मौजूद नहीं मिले. अब 6 फरवरी तक वोटर लिस्ट में दावे और आपत्तियां की जाएंगी.

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कुमार अभिषेक

06 Jan 2026 (अपडेटेड: 06 Jan 2026, 10:57 AM)

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यूपी में आज यानी 6 जनवरी को 12.55 करोड़ वोटर्स की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होगी. यूपी में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के बाद करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम लिस्ट से हटाए जा सकते हैं. यह ऐसे वोटर्स हैं जो या तो स्थानांतरित हो चुके हैं, या उनकी मौत हो चुकी है. या फिर जब SIR की प्रक्रिया चल रही थी तब वे मौके पर मौजूद नहीं मिले. सभी जिलों में ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन की तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं. सोमवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने बैठक कर तैयारियों को पुख्ता किया था.

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अब 6 फरवरी तक वोटर लिस्ट में दावे और आपत्तियां की जाएंगी

आज (6 जनवरी) से 6 फरवरी तक मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां की जाएंगी. मंगलवार से 27 फरवरी तक दावे का निस्तारण होगा. अंतिम सूची का प्रकाशन 6 मार्च को होगा. निर्वाचन आयोग के सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अब तक कुल 15 करोड़ 44 लाख मतदाता दर्ज थे. लेकिन SIR प्रक्रिया के बाद जो ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की जा रही है, उसमें करीब 12 करोड़ 55 लाख मतदाता ही शामिल होंगे. यानी लगभग 2 करोड़ 89 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं.

लखनऊ से कटे 12 लाख मतदाताओं के नाम

सर्वाधिक 12 लाख मतदाताओं के नाम लखनऊ से कटे हैं. जिला निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, अब ड्राफ्ट मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां प्रस्तुत की जा सकती हैं. इसके बाद इन आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा. फरवरी महीने के आखिर में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी जाएगी.

लखनऊ में करीब 4.57 लाख मतदाता ऐसे थे जो दिए गए पते पर नहीं मिले. लखनऊ में गणना प्रपत्र न भरने वाले मतदाताओं के नाम सूची से कट गए हैं. इनमें 1.27 मतदाता ऐसे हैं जिनकी मौत हो चुकी है. वहीं, 5.39 लाख मतदाता दूसरी विधान सभा या जिले में ट्रांसपर हो चुके हैं.

आज दोपहर 3 बजे होगी चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस

निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, जिनका नाम साल 2003 की मतदाता सूची में मिल गया या जिनके अभिभावकों का नाम उसमें था ऐसे वोटर सूची में बने रहेंगे. उनकी मैपिंग का काम पूरा हो चुका है. वहीं, जिनका या जिनके अभिभावकों का नाम नहीं मिल पाया, उन्हें ईआरओ का नोटिस जाएगा. उसके जवाब में मतदाता को निर्वाचन आयोग की ओर से जारी 12 दस्तावेजों में से किसी एक की फोटो कॉपी अपने साइन के साथ देनी होगी. आज सीईओ नवदीप रिणवा की तरफ से लखनऊ में दोपहर 3 बजे प्रेस कांफ्रेंस भी की जाएगी.

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