Ankit Bhati Interview: देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक SSC GD भर्ती परीक्षा पर इस समय हैकिंग और धांधली की वजह से चर्चा में है. देश के युवाओं की आवाज बुलंद करने वाले शिक्षक अंकित भाटी सर ने 'यूपी Tak' से खास बातचीत में ऑनलाइन परीक्षा (CBT) की सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी हैं. अंकित भाटी ने आधिकारिक बयानों का हवाला देते हुए खुलासा किया कि ऑफलाइन परीक्षाओं में पेपर लीक होता है. वहीं ऑनलाइन परीक्षाओं में सीधे कंप्यूटर सिस्टम हैक कर लिया जाता है. उन्होंने एसटीएफ की जांच के हवाले से 'ईश्वर प्रसाद' नाम के एक मुख्य आरोपी का जिक्र करते हुए बताया कि देश के 100 से लेकर 500 से अधिक लैब्स में धांधली का यह खेल चल रहा है जिस पर शासन-प्रशासन पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है.
ADVERTISEMENT
कैसे होती है हैकिंग?
अंकित भाटी सर ने ऑनलाइन कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) में हो रही धांधली के तरीके को समझाते हुए कहा कि यह ऑफलाइन पेपर लीक से कहीं ज्यादा खतरनाक है. उन्होंने बताया कि 'ऑफलाइन में पेपर वॉट्सऐप पर आता है तो हंगामा मचता है और मैच होने पर परीक्षा रद्द हो जाती है, जैसा NEET में हुआ. लेकिन ऑनलाइन में कोई सवाल बाहर नहीं आता. एग्जाम कराने वाली कंपनी के अंदरूनी कर्मचारियों से मिलकर पूरा सिस्टम (लैपटॉप/कंप्यूटर) पहले से हैक कर लिया जाता है. बच्चा बस स्क्रीन के सामने बैठा रहता है और दूर बैठा सॉल्वर रिमोट एक्सेस के जरिए सारे टिक खुद लगा देता है. यहां तक कि सेंटर्स के सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग तक को ये लोग चेंज कर देते थे.'
मास्टरमाइंड ईश्वर प्रसाद और 30% प्रॉफिट का खेल
इस धांधली के सबूतों पर बात करते हुए अंकित सर ने बताया कि एसटीएफ की गिरफ्त में आए ईश्वर प्रसाद नाम के व्यक्ति ने इस पूरे सिंडिकेट का खुलासा किया है. 'ईश्वर प्रसाद नाम के शख्स को पकड़ा गया है जिसने कबूला है कि उसने अलग-अलग नामों से यूपी, हरियाणा और राजस्थान में सैकड़ों लैब्स ले रखी थीं. परीक्षा कराने वाली कंपनी के कर्मचारियों से उसकी पहले ही सेटिंग थी कि लैब तुम खोलो, सेटिंग हम करेंगे. इस धांधली से बच्चों से जो भी पैसा आएगा, उसमें उस मास्टरमाइंड की 30 फीसदी मुनाफे की हिस्सेदारी तय थी. एसटीएफ के आधिकारिक बयान के मुताबिक, 100 से अधिक लैबों में इसकी आशंका है जो बढ़कर 500 भी हो सकती है. अगर एक शिफ्ट में एक लैब से सिर्फ 20 बच्चे भी पास कराए जा रहे हों, तो सोचिए 40 शिफ्टों में कितने हजार अयोग्य बच्चे बढ़िया नंबर पा जाएंगे.'
'तकनीकी कारण' बताकर सच छुपाता है प्रशासन!
अंकित भाटी ने शासन और परीक्षा कराने वाली संस्था (SSC) के रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि वे बच्चों के गुस्से से बचने के लिए सच को छुपाते हैं. हाल ही में कानपुर में कुछ लैब्स पकड़ी गईं. लेकिन प्रशासन कभी सीधे यह नहीं बताता कि वहां धांधली या हैकिंग चल रही थी. वे छात्रों के बीच अफरातफरी और आक्रोश को रोकने के लिए चालाकी से नोटिस निकाल देते हैं कि 'तकनीकी कारणों' से इन सेंटर्स के एग्जाम री-शेड्यूल किए जाते हैं. SSC या NTA जैसी संस्थाएं सीधे कह देती हैं कि जहां हैक हुआ, हमने उन्हें पकड़कर जेल भेज दिया, खेल खत्म. लेकिन इस बात की क्या गारंटी है कि जितने पकड़े गए सिर्फ उतने ही थे? जो छूट गए वे तो नौकरी पा जाएंगे. ऐसे में ऑनलाइन परीक्षा की पारदर्शिता कहां रह गई?'
मामले की हो CBI जांच
इंटरव्यू के आखिर में अंकित भाटी ने सरकार के सामने दो मांगें रखीं. उन्होंने साफ कहा कि इस स्तर की हाई-टेक हैकिंग को पकड़ने के लिए राज्य की पुलिस या एसटीएफ के पास पर्याप्त और आधुनिक उपकरण नहीं हैं. 'एसटीएफ भले ही जांच कर रही है. लेकिन डर है कि पर्याप्त डिजिटल सबूत न जुटा पाने के कारण ईश्वर प्रसाद जैसे बड़े मगरमच्छ आसानी से बचकर निकल जाएंगे. हमारी मांग है कि SSC अपनी परीक्षाओं की पारदर्शिता साबित करने के लिए आगे आए और घोषणा करे कि एक भी सेंटर पर हैकिंग मिली, तो पूरा एग्जाम रद्द होगा. साथ ही इस पूरे मामले की जांच CBI को सौंपी जानी चाहिए. अगर सीबीआई ने एक बार इस पूरे नेक्सस की जांच कर दी तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा कि यह खेल कितने बड़े स्तर पर खेला जा रहा था.'
ADVERTISEMENT









