उत्तर प्रदेश में अवैध कोडीन सिरप नेटवर्क के खिलाफ पुलिस और एसटीएफ ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है. लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में दर्ज एक मुकदमे के तहत इस पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड और 1 लाख रुपये के इनामी अपराधी शुभम जायसवाल समेत उसके दो और साथी वरुण सिंह और गौरव जायसवाल को अदालत ने भगोड़ा घोषित कर दिया है. कोर्ट से लुकआउट नोटिस और गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद भी जब ये आरोपी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़े तो अब प्रशासन इनकी करोड़ों की संपत्ति को कुर्क करने की कानूनी तैयारी में जुट गया है. बताया जा रहा है कि पुलिस की कार्रवाई की भनक लगते ही ये तीनों शातिर आरोपी भारत छोड़कर दुबई भाग गए हैं.
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फर्जी फार्मा कंपनियों के जरिए देश-विदेश में फैला था नेटवर्क
उत्तर प्रदेश का यह कोडीन कफ सिरप केस राज्य के सबसे बड़े और संगठित नशा तस्करी नेटवर्क में से एक माना जा रहा है. कोडीन फॉस्फेट एक प्रतिबंधित और बेहद नशीला तत्व है जिसका इस्तेमाल कफ सिरप में किया जाता है. यूपी एसटीएफ की तफ्तीश में सामने आया है कि यह गैंग फर्जी फार्मा कंपनियों, नकली ड्रग लाइसेंस और जाली बिलों के सहारे वैध फैक्ट्रियों से करोड़ों रुपये की कोडीन सिरप की खेप उठाता था. इसके बाद इस खेप को उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों समेत अन्य राज्यों और नेपाल व बांग्लादेश की सीमाओं पर नशेड़ियों को कई गुना ऊंचे और महंगे दामों पर सप्लाई किया जाता था.
पुलिस का शिकंजा कसते ही दुबई हुए रफूचक्कर
एसटीएफ की जांच के मुताबिक, 1 लाख का इनामी शुभम जायसवाल, वरुण सिंह और गौरव जायसवाल इस पूरे अवैध काले साम्राज्य के मुख्य फाइनेंसर और लॉजिस्टिक्स हेड थे. इन्होंने अलग-अलग कंपनियों के नाम पर करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेन-देन किया और पुलिस की नजरों से बचने के लिए बड़े पैमाने पर हवाला नेटवर्क का भी इस्तेमाल किया. जैसे ही यूपी पुलिस और एसटीएफ ने इस सिंडिकेट पर शिकंजा कसना शुरू किया ये तीनों मुख्य आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए देश छोड़कर दुबई भाग निकले.
लुकआउट नोटिस के बाद अब होगी संपत्ति की कुर्की
आरोपियों के देश से बाहर भागने के बाद अदालत ने इनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट और इंटरनेशनल लुकआउट नोटिस भी जारी किया था. इसके बावजूद जब तीनों आरोपी कानून के सामने हाजिर नहीं हुए तो अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए तीनों को आधिकारिक तौर पर भगोड़ा घोषित कर दिया है. अब पुलिस और जांच एजेंसियां इन तीनों अपराधियों की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क करने की अंतिम विधिक प्रक्रिया शुरू कर रही हैं.
सिंडिकेट के 18 गुर्गे पहले ही पहुंच चुके हैं जेल
उत्तर प्रदेश शासन इस पूरे ड्रग रैकेट को जड़ से उखाड़ने के लिए बेहद गंभीर है. यही वजह है कि इसकी कमान सीधे यूपी एसटीएफ को सौंपी गई है. एसटीएफ और स्थानीय पुलिस इस सिंडिकेट से जुड़े छोटे-बड़े हर मोहरे पर नजर रख रही है. आपको बता दें कि इस पूरे अवैध नेटवर्क और सिंडिकेट से जुड़े 18 सह-आरोपियों व तस्करों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज चुकी है.
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