उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासन ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए कसेरुआ गांव स्थित मुस्तफा कादरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया. प्रशासन का दावा है कि यह निर्माण कब्रिस्तान के लिए आरक्षित सरकारी जमीन पर अवैध रूप से किया गया था. इलाके की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है. दो बुलडोजर और एक क्रेन की मदद से भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कई घंटे तक यह ध्वस्तीकरण की कार्रवाई चली.
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मस्जिद परिसर से मिले पोस्टर और झंडे, पुलिस जांच में जुटी
मस्जिद परिसर से 'आई लव मोहम्मद' लिखे पोस्टर और हरे रंग का एक झंडा मिलने की बात कही जा रही है, जिसे पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है. इस मामले में पुलिस अधीक्षक (SP) कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि बरामद किए गए पोस्टरों और झंडे के संबंध में गहन जांच की जा रही है. पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि इन सामग्रियों को वहां किसने रखा था और इसके पीछे उनका क्या उद्देश्य था. सभी तथ्यों की जांच पूरी होने के बाद ही आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.
कब्रिस्तान की जमीन पर कब्जे का मामला, जनवरी 2026 में हुई थी पैमाइश
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा मामला सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़ा हुआ है:
आरक्षित जमीन: सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, गाटा संख्या 409 की यह भूमि कब्रिस्तान के लिए आरक्षित थी.
पैमाइश में खुलासा: जनवरी 2026 में राजस्व विभाग की टीम द्वारा की गई पैमाइश के दौरान इस आरक्षित भूमि पर मस्जिद निर्माण और अवैध कब्जे का मामला उजागर हुआ था.
अदालती प्रक्रिया: मामला सामने आने के बाद तहसीलदार न्यायालय में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत वाद दायर किया गया. सुनवाई के दौरान मस्जिद समिति को अपने पक्ष में साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर दिया गया, लेकिन प्रशासन के मुताबिक समिति की ओर से कोई वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके.
अपील खारिज होने के बाद शुरू हुआ कोर्ट के आदेश का अनुपालन
संभल के जिलाधिकारी (DM) अंकित खंडेलवाल ने बताया कि तहसीलदार न्यायालय द्वारा अवैध कब्जा हटाने का स्पष्ट आदेश जारी किया गया था. मस्जिद समिति ने इस आदेश को चुनौती देते हुए जिलाधिकारी न्यायालय में एक अपील दायर की थी, लेकिन जिलाधिकारी न्यायालय से भी यह अपील खारिज हो गई. इसके बाद ही कोर्ट के आदेश के अनुपालन में ध्वस्तीकरण की यह कार्रवाई शुरू की गई.
तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने मामले की पृष्ठभूमि की जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीणों ने प्रशासन से कब्रिस्तान के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग की थी. इसके बाद जब सरकारी अभिलेखों (Records) की जांच की गई, तो आरक्षित भूमि पर इस निर्माण का पता चला. प्रशासन का कहना है कि अब इस कब्जामुक्त कराई गई भूमि को ग्राम सभा के माध्यम से वापस कब्रिस्तान के उपयोग के लिए ही उपलब्ध कराया जाएगा.
गांव में 4 थानों की फोर्स तैनात, अफवाहों से बचने की अपील
कार्रवाई को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए कसेरुआ गांव में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं. मौके पर चार थानों की पुलिस फोर्स और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. फिलहाल इलाके में पूरी तरह शांति है और प्रशासन ने स्थानीय लोगों से शांति व्यवस्था बनाए रखने तथा सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर फैलने वाली किसी भी तरह की अफवाहों से बचने की अपील की है.
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