Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और वित्तीय गड़बड़ी की जांच कर रही एसआईटी के हाथ बड़ी जानकारियां लगी हैं. जांच के दौरान मंदिर के संचालन और ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों का पूरा ब्यौरा सामने आ गया है. सूत्रों के मुताबिक, जांच में साफ हुआ है कि मंदिर के हर छोटे-बड़े फैसलों और गतिविधियों की सीधी जानकारी निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय तक पहुंचती थी. इस बीच एसआईटी के सामने सबसे बड़ी पहेली 60 किलो चांदी की शिलाएं बन गई हैं जिनका मंदिर प्रशासन के पास कोई ठोस रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है. मामले की कड़ियों को जोड़ने के लिए लखनऊ कमिश्नर विजय विश्वास पंत और आईजी किरण एस. समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने कमान संभाल ली है.
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किसके पास थी क्या जिम्मेदारी? एसआईटी ने खंगाला रिकॉर्ड
एसआईटी अब मंदिर के भीतर काम के बंटवारे के आधार पर जवाबदेही तय कर रही है. जांच में सामने आया है कि परिसर के भीतर प्रमुख काम इन अधिकारियों के जिम्मे थे.
नृपेंद्र मिश्रा और चंपत राय: ट्रस्ट और मंदिर के सभी महत्वपूर्ण मामलों, बड़े निर्णयों और दैनिक गतिविधियों की पूरी रिपोर्टिंग इन दोनों शीर्ष पदाधिकारियों को होती थी.
रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव: इनके पास श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था संभालने के साथ-साथ सबसे संवेदनशील काम यानी 'चढ़ावे और दान की देखरेख' की जिम्मेदारी थी.
गोपाल राय और अनिल मिश्रा: इन दोनों पदाधिकारियों के पास मंदिर परिसर की साफ-सफाई और उससे जुड़ी अन्य आंतरिक व्यवस्थाओं का जिम्मा था.
एसआईटी अब संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बयानों का मिलान उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों से कर रही है ताकि यह समझा जा सके कि बहुमूल्य चढ़ावों के संग्रह और रिकॉर्डिंग में चूक कहां हुई.
60 किलो चांदी की शिलाएं बनीं पहेली
इस पूरे मामले में सबसे सनसनीखेज मोड़ उन तस्वीरों से आया है जिनकी तलाश में एसआईटी पिछले 6 दिनों से खाक छान रही है. राम मंदिर की नींव में रखे जाने के लिए देश भर के ज्वेलर्स एसोसिएशन द्वारा 60 किलो चांदी की शिलाएं भेंट की गई थीं, जो अब गायब हैं.
एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुराग रस्तोगी का दावा है कि उनके पास ये शिलाएं ट्रस्ट को सौंपने की बकायदा पुख्ता रसीद मौजूद है. उनका कहना है कि नींव पूजन और निर्माण के दौरान ये शिलाएं कहीं दिखाई नहीं दीं और उसके बाद से इनका कोई अता-पता नहीं है. एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि यह सिर्फ कागजी लापरवाही का मामला है या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा था.
टिन्नू यादव से तीसरी बार पूछताछ, पैसे गिनने वाले लवकुश पर कसा शिकंजा
जांच एजेंसी कड़े एक्शन मोड में है और संदिग्धों से लगातार पूछताछ की जा रही है. मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए कैश (नकदी) की गिनती का काम देखने वाले कर्मचारी लवकुश मिश्रा से एसआईटी कड़ी पूछताछ कर रही है. पैसे गिनने की प्रक्रिया, रिकॉर्ड का रखरखाव और रकम ट्रांसफर करने के तरीकों पर सवाल-जवाब हो रहे हैं. मामले के मुख्य किरदार माने जा रहे टिन्नू यादव को एसआईटी ने लगातार तीसरी बार तलब कर पूछताछ की है.
पुजारियों और आभूषण प्रभारी ने झाड़ा पल्ला
एसआईटी ने रामलला के मुख्य चार पुजारियों, टिन्नू यादव और आभूषणों की देखरेख करने वाले कृष्णदेव तिवारी से भी आमने-सामने बिठाकर बात की. हालांकि आभूषण प्रभारी कृष्णदेव तिवारी ने रामलला के हार, चरण पादुका और इन गायब चांदी की शिलाओं के संबंध में किसी भी तरह की जानकारी होने से साफ इनकार कर दिया है. लखनऊ कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस. और विशेष सचिव नीलरतन कुमार की उच्च स्तरीय टीम अब रसीदों, सीसीटीवी फुटेज और बयानों का डिजिटल मिलान कर रही है ताकि इस महाघोटाले के असली मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके.
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