Abdul Rehman Story: लखनऊ अग्निकांड हादसे में जान गंवाने वाले बालागंज के अब्दुल रहमान की कहानी किसी को भी रुला देगी. महज तीन महीने पहले शादी के बंधन में बंधे अब्दुल अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य और बूढ़े माता-पिता का एकमात्र सहारा थे. पैरालिसिस से ग्रस्त पिता और गंभीर बीमारियों से जूझ रही मां के बुढ़ापे की लाठी आज टूट चुकी है. हादसे के चंद मिनट पहले मां से बात करने वाले अब्दुल फिर कभी घर नहीं लौटे. रोते-बिलखते परिजनों का आरोप है कि अब्दुल की मौत आग से जलने से नहीं बल्कि रेस्क्यू में हुई देरी और दम घुटने के कारण हुई है.
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कैमरे के सामने फूट-फूट कर रो पड़े पैरालिसिस पीड़ित पिता
अब्दुल रहमान के घर में इस वक्त मातम पसरा हुआ है और परिजनों की चीखें थमने का नाम नहीं ले रही हैं. अब्दुल के पिता लंबे समय से पैरालिसिस से पीड़ित हैं. हादसे की खबर मिलने के बाद से उनकी आंखों से आंसू थम नहीं रहे हैं. मीडिया का कैमरा सामने आते ही वह फूट-फूट कर रो पड़े और बिना कुछ बोले बस शून्य को निहारते रहे. वहीं अब्दुल की मां भी किडनी स्टोन और हाई बीपी की मरीज हैं. वह सदमे के कारण इस स्थिति में भी नहीं थीं कि कैमरे के सामने आकर दो शब्द बोल सकें.
"अम्मा, आज सब्जी बहुत अच्छी बनी है..."
अब्दुल रहमान की बहन और चचेरे भाई ने बताया कि अब्दुल का एक तय रूटीन था कि वह रोज दोपहर में खाना खाने से पहले अपनी मां को फोन जरूर करते थे. हादसे वाले दिन भी दोपहर करीब 1 बजे उन्होंने घर फोन किया. उन्होंने बेहद खुश होकर मां से कहा 'अम्मा, खाना खा लिया है. आज सब्जी बहुत अच्छी बनी थी. अब मैं नमाज पढ़ने जा रहा हूं.' नमाज पढ़कर वह जैसे ही ऑफिस लौटे, वहां काल बनकर आई आग ने पूरी बिल्डिंग को घेर लिया. इसके बाद जब परिजनों ने फोन किया तो अब्दुल का मोबाइल स्विच ऑफ आने लगा और शाम होते-होते उनकी मौत की खबर घर पहुंची.
3 महीने पहले ही हुई थी शादी
अब्दुल रहमान की शादी को अभी ठीक से तीन महीने भी नहीं हुए थे. बीती 25 तारीख को ही उनके निकाह को तीन महीने पूरे हुए थे. जिस घर में अभी शादी की खुशियों का माहौल था, वहां अब मातम का सन्नाटा है. अब्दुल स्वभाव से बेहद शांत, पांच वक्त के नमाजी और अपने काम से काम रखने वाले होनहार युवक थे. उन्होंने कुछ समय पहले ही जॉब शुरू की थी ताकि बीमार माता-पिता का इलाज और घर का खर्च चला सकें.
अब्दुल की बहन का आरोप है कि बिल्डिंग में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे. वहां ना तो वहां फायर एग्जिट था और न ही अग्निशमन यंत्र. एनडीआरएफ और फायर ब्रिगेड की टीमें भी मौके पर काफी देर से पहुंचीं. परिजनों का साफ कहना है कि उनके भाई की मौत जलने से नहीं हुई बल्कि समय पर खिड़की-दीवार न तोड़े जाने और दम घुटने की वजह से हुई.
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