Ram Mandir News: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और कथित अनियमितताओं की जांच अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर है कि विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी जांच लगभग पूरी कर ली है और करीब 140 पन्नों की एक बेहद विस्तृत और गोपनीय रिपोर्ट तैयार कर ली है. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद राम मंदिर परिसर से लेकर लखनऊ और दिल्ली के सियासी व धार्मिक गलियारों में भारी हलचल मच गई है. माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर आने वाले दिनों में मंदिर प्रशासन में बड़े स्तर पर गाज गिर सकती है.
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सवालों के घेरे में सेवादार, कई कर्मचारियों की सेवाएं हो सकती हैं समाप्त
SIT की इस 140 पन्नों की रिपोर्ट में कई ऐसे गंभीर बिंदु दर्ज किए गए हैं, जिनके आधार पर मंदिर परिसर में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई होना तय माना जा रहा है. सबसे ज्यादा गाज उन सेवादारों और कर्मचारियों पर गिरने की आशंका है, जिनकी भूमिका जांच के दौरान संदिग्ध पाई गई है. सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही कई सेवादारों की सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं. हालांकि, अभी तक किसी भी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन मंदिर परिसर के भीतर कार्रवाई की सुगबुगाहट तेज है.
बंद कमरे में ट्रस्ट सचिव से 3 घंटे तक पूछताछ, अयोध्या में डटी है टीम
जांच को पुख्ता करने के लिए SIT ने राम मंदिर ट्रस्ट के सचिव से बंद कमरे में करीब तीन घंटे तक कड़ी पूछताछ की है. इस दौरान जांच अधिकारियों ने चढ़ावे के संग्रह, सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी तंत्र और पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर तीखे सवाल पूछे.
भले ही 140 पन्नों की रिपोर्ट का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है, लेकिन SIT की गतिविधियां अभी रुकी नहीं हैं. टीम के कई सदस्य अभी भी अयोध्या में डेरा डाले हुए हैं और कुछ तकनीकी बिंदुओं पर अंतिम सत्यापन कर रहे हैं ताकि रिपोर्ट कानूनी रूप से पूरी तरह मजबूत रहे.
महासचिव चंपत राय पर टिकीं नजरें
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की जवाबदेही को लेकर उठ रहा है. दशकों तक आरएसएस (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पूर्णकालिक प्रचारक रहे चंपत राय को मंदिर आंदोलन का सबसे प्रमुख चेहरा माना जाता है. समर्थक आज भी उनके अनुशासित और सादगीपूर्ण जीवन का तर्क देकर उन्हें बेदाग बता रहे हैं, लेकिन आलोचकों का कहना है कि अगर व्यवस्था में इतनी बड़ी चूक हुई है, तो शीर्ष नेतृत्व अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता.
इस विवाद के बहाने अयोध्या के संतों और पुराने कार्यकर्ताओं का वह असंतोष भी अब खुलकर बाहर आ गया है, जो ट्रस्ट के गठन के समय से दबा हुआ था. कई संतों का आरोप है कि पूरी व्यवस्था को एक केंद्रीय नेतृत्व के तहत चलाया जा रहा था, इसलिए किसी भी गड़बड़ी की सीधी जवाबदेही तय होनी ही चाहिए.
क्या चंपत राय को मिलेगी क्लीन चिट? ट्रस्ट में बड़े बदलावों की सुगबुगाहट
अब सबसे बड़ा सस्पेंस इसी बात को लेकर है कि 140 पन्नों की यह रिपोर्ट महासचिव चंपत राय को पूरी तरह राहत देती है या फिर इसके निष्कर्ष उनके भविष्य को प्रभावित करेंगे. राजनीतिक और धार्मिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि इस विवाद के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज के तरीके में आमूल-चूल बदलाव किए जा सकते हैं. दान प्रबंधन को और अधिक पारदर्शी और प्रोफेशनल बनाने के लिए एक नया सिस्टम लागू किया जा सकता है. फिलहाल, सबकी नजरें इस बात पर हैं कि इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद पहला एक्शन किस पर होता है.
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