लखीमपुर खीरी हिंसा: सरकार ने जांच आयोग का गठन किया, हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे जांच

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लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में 3 अक्टूबर को हुई हिंसा की जांच के लिए जांच आयोग का गठन कर दिया गया है. इस एक सदस्यीय जांच आयोग में इलाहाबाद हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज प्रदीप कुमार श्रीवास्तव शामिल किए गए हैं. प्रदेश की योगी सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है.

इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज प्रदीप कुमार श्रीवास्तव लखीमपुर खीरी में 8 लोगों की मौत मामले की जांच करेंगे. सरकार की तरफ से जारी अधिसूचना के मुताबिक जांच आयोग 2 महीने के भीतर अपनी जांच पूरी करेगा. योगी सरकार की तरफ से लखीमपुर खीरी कांड के सभी 8 मृतकों के परिजनों को मुआवजे के रूप में 45-45 लाख रुपये की राशि भी दी गई है.

जानें क्या है लखीमपुर खीरी कांड?

लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में 3 अक्टूबर को किसान आंदोलनकारियों संग हिंसक झड़प में 8 लोगों की मौत हो गई थी. मृतकों में 4 किसान, 3 बीजेपी से जुड़े लोग और एक पत्रकार शामिल हैं. संयुक्त किसान मोर्चा के मुताबिक किसान आंदोलनकारी उस दिन डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के कार्यक्रम का विरोध कर रहे थे. संयुक्त किसान मोर्चा का आरोप है कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा के काफिले ने किसानों को रौंद दिया.

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हालांकि मंत्री और उनके बेटे ने इन आरोपों का खंडन करते हुए दावा किया है कि किसानों की आड़ में अराजक तत्वों ने बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या की है. इस मामले में मंत्री के बेटे के खिलाफ केस भी दर्ज किया गया है.

राकेश टिकैत और संयुक्त किसान मोर्चा ने दिया अल्टीमेटम

इस मामले में किसान नेता राकेश टिकैत ने कार्रवाई के लिए सरकार को 7-8 दिन का अल्टीमेटम दिया है. टिकैत ने यूपी तक से बातचीत में कहा है कि अगर इस दौरान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी की बर्खास्तगी और उनके बेटे आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी नहीं होती है तो देशव्यापी आंदोलन होगा. वहीं संयुक्त किसान मोर्चा ने भी कहा है कि मृत किसानों की अंतिम अरदास के दिन तक अगर मंत्री को बर्खास्त करने, आरोपी बेटे को गिरफ्तार करने की मांग नहीं पूरी हुई, तो बड़ा आंदोलन होगा.

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