तो क्या इसलिए बलिया के अपर पुलिस अधीक्षक हुए सस्पेंड? जानिए पर्दे के पीछे का खेल

तो क्या इसलिए बलिया के अपर पुलिस अधीक्षक हुए सस्पेंड? जानिए पर्दे के पीछे का खेल
फोटो: संतोष शर्मा

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में तैनात अपर पुलिस अधीक्षक को प्रदेश शासन ने एक जालसाज को इंटेलिजेंस का बड़ा अफसर बताने के चलते सस्पेंड कर दिया है. मगर कहानी इतनी सीधी और सपाट नहीं है, जितनी बताई जा रही है. बलिया में पीपीएस अफसर के इस सस्पेंशन के पीछे वसूली का खेल और इस वसूली के खेल की शिकायत बड़ी वजह बताई जा रही है.

बलिया में जो हुआ उसने महोबा खनन वसूली केस की याद दिलाई:

महोबा में खनन कारोबारी इंद्र कांत त्रिपाठी से वसूली के खेल ने उत्तर प्रदेश पुलिस के माथे पर जो कलंक लगाया, उसे आज तक धोया नहीं जा सका है. बताया जा रहा है कि बलिया में भी पुलिस में वसूली को लेकर ही अफसरों के बीच झगड़ा चल रहा है. बलिया के एडिशनल एसपी विजय त्रिपाठी वाराणसी के दवा व्यापारी विकास कुमार सिंह को इंटेलिजेंस का अफसर बताकर लोगों से मिलाते थे और गोपनीय जांच के अनुसार वह जालसाज जिले में कई लोगों से काम करवाने के नाम पर पैसे वसूल रहा था.

पहले समझ लीजिए यह विकास सिंह है कौन?

विकास सिंह बलिया के बैरिया थाना क्षेत्र के चकिया गांव का रहने वाला है. पेशे से विकास सिंह दवा कारोबारी है. वाराणसी के दुर्गाकुंड इलाके में उसके दवा की फर्म है. चकिया में विकास सिंह की पुश्तैनी जमीन जायदाद है, जिसकी देखरेख के लिए वह बलिया आता रहता है. बड़ी-बड़ी गाड़ियों से चलने वाला विकास सिंह अफसरों के किचन केबिनेट का हिस्सा रहा है. जिले के कई थानेदार से लेकर अफसर तक विकास सिंह के दोस्त माने जाते हैं.

अब बात उस गोपनीय पत्र की, जिसमें बलिया जिले में हो रही पुलिस की अवैध वसूली की शिकायत मुख्यमंत्री से की गई:

दरअसल, अप्रैल महीने की 8 और 18 तारीख को दो पत्र मुख्यमंत्री से लेकर डीजीपी, चीफ सेक्रेटरी, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर और वाराणसी जोन के एडीजी को भेजे गए. शिकायती पत्र को बलिया की पुलिस कर्मियों की तरफ से भेजा गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि बिहार के बक्सर और छपरा बॉर्डर पर अवैध शराब और अवैध खनन से वसूली हो रही है. 3 पेज के शिकायती पत्र में एसएचओ बैरिया पर वसूली के गंभीर आरोप लगे. रजिस्टर्ड डाक से भेजे गए पत्र के बारे में पता लगाया गया, तो पता चला कि पत्र वाराणसी के आरएमएस पोस्ट ऑफिस से भेजा गया था.

सिगरा थाने के पुलिसकर्मियों की मदद से आरएमएस में लगे सीसीटीवी को खंगाला गया तो विकास सिंह की दुकान पर पेंटर का काम करने वाला संतोष सिंह नजर आया. सिगरा पुलिस ने संतोष सिंह से पूछताछ की तो पता चला कि पत्र को रजिस्ट्री करने के लिए विकास सिंह ने कहा था और उसी ने वह लिफाफा बंद करके दिया था. मुख्यमंत्री से बलिया जिले में पुलिस के अवैध खनन की शिकायत करने वाला यह वही विकास सिंह है जिसको एडिशनल एसपी विजय त्रिपाठी का करीबी बताया गया और विजय त्रिपाठी उसे इंटेलिजेंस का अफसर बताकर लोगों से मिलवाते थे.

अब इसे इत्तेफाक कहें या कुर्सी बचाने के लिए पुलिस कर्मियों की प्लानिंग का हिस्सा?

जैसे ही मुख्यमंत्री से की गई शिकायत पर शासन से पूछताछ और तहकीकात की जाने लगी तभी बलिया कोतवाली थाने में 21 मई को गाजीपुर के रहने वाले हरि प्रकाश सिंह की तरफ से विकास सिंह पर 1लाख रुपये लेकर नौकरी दिलाने के नाम पर किए गए धोखे की एफआईआर दर्ज करवाई गई. और 3 दिन बाद 24 मई को विकास सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया.

खनन के कारोबार में होने वाली वसूली की कमाई को लेकर अफसरों के बीच तलवारें चलीं!

मिली जानकारी के अनुसार, बलिया में लंबे समय से खनन के कारोबार में होने वाली वसूली की कमाई को लेकर अफसरों के बीच खींचतान मची थी. जिस एसओ बैरिया ने विकास सिंह को एडिशनल एसपी विजय त्रिपाठी का करीबी बताकर इंटेलिजेंस अफसर होने की पुष्टि की थी, उसी SHO बैरिया को मुख्यमंत्री से की गई शिकायत में अवैध खनन का सबसे बड़ा सरगना बताया गया.

इस संबंध में बलिया के एसपी राजकरण नैयर से पूछा गया तो उन्होंने साफ कहा कि सोशल मीडिया के जरिए शिकायती पत्र मिला है लेकिन बुक किसकी तरफ से भेजा गया है यह कहा नहीं जा सकता. विकास सिंह को नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के आरोप में जेल भेजा गया है उसके पास से कंप्यूटर से तैयार की गई फोटो मिली है. शातिर दिमाग विकास सिंह ने अपने मोबाइल से भी डाटा को डिलीट किया है जिसको रिकवर करने के लिए मोबाइल फॉरेंसिक लैब भेजा जाएगा.

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