'द ग्रेट चमार' बोर्ड से संसद तक...जानें कैसे चंद्रशेखर आजाद बनें दलित राजनीति का नया चेहरा
चंद्रशेखर आजाद रावण: 'द ग्रेट चमार' बोर्ड से लेकर संसद तक का पूरा सफर. जानें करणी सेना के साथ उनके हालिया विवाद की सच्चाई और मंच से दिए गए 'चमड़ी उतारने' वाले बयान का सियासी मतलब. भीम आर्मी चीफ की जेल यात्रा, उन पर हुआ हमला और 2027 के चुनाव के लिए उनकी तैयारियों का विशेष विश्लेषण.
ADVERTISEMENT
Chandrasekhar Azad Story: सहारनपुर के एक छोटे से गांव छुटमलपुर से निकलकर भारतीय संसद तक पहुंचने वाले चंद्रशेखर आजाद रावण की कहानी संघर्ष, विवाद और रणनीतिक जीत का मिश्रण है. हाल ही में बाराबंकी में आयोजित एक रैली के दौरान उन्होंने करणी सेना की धमकियों का जिस अंदाज में जवाब दिया उसने उनके समर्थकों में जोश भर दिया है. मंच से उन्होंने दो-टूक कहा "हम चमड़ा उतारना भी जानते हैं. जूता बनाना भी जानते हैं और उसे सर पर मारना भी जानते हैं.' यह बयान न केवल उनके आक्रामक तेवर दिखाता है बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उनकी बढ़ती महत्वाकांक्षाओं का संकेत भी है.