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Mood Kya Hai Fatehpur: बीजेपी के प्रत्याशी बदलने की बात क्यों बोले रहे हैं फतेहपुर के पत्रकार?

फतेहपुर में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल गर्म है. छह सीटों पर बीजेपी-सपा के बीच मुकाबले, पीडीए फॉर्मूला, जातीय समीकरण, बेरोजगारी, विकास, महंगाई और स्थानीय मुद्दे चुनावी तस्वीर बदल सकते हैं. जानिए पत्रकारों का आकलन और संभावित समीकरण.

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Mood Kya Hai Fatehpur
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Mood Kya Hai Fatehpur: यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले फतेहपुर जिले की सियासी फिजा गरमाने लगी है.जिले की छह विधानसभा सीटों (सदर, हुसैनगंज, खागा, अयाशा, बिंदकी और जहानाबाद) पर चुनावी माहौल, जमीनी मुद्दों और संभावित समीकरणों को लेकर यूपी Tak ने स्थानीय वरिष्ठ पत्रकारों से खास बातचीत की.

फतेहपुर का राजनीतिक मिजाज और 2027 का माहौल

वर्तमान में फतेहपुर की छह सीटों में से चार पर भारतीय जनता पार्टी (जिसमें एक सीट सहयोगी दल अपना दल-एस के पास है) और दो सीटों पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है. 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले ने भाजपा के कैडर वोट बैंक में सेंध लगाई थी जिससे 2027 के चुनाव में दोनों दलों के बीच सीधी और कड़ी टक्कर होने के आसार हैं.

स्थानीय पत्रकारों का मानना है कि जिले में चुनाव केवल विकास के दावों पर नहीं बल्कि प्रत्याशी के चेहरे, स्थानीय मुद्दों और मजबूत जातीय समीकरणों पर निर्भर करेगा.

विकास, कानून-व्यवस्था और स्थानीय मुद्दे

विकास के दावे बनाम हकीकत: पत्रकारों के अनुसार, सिर्फ एक्सप्रेसवे बना देना ही विकास का मापदंड नहीं हो सकता. शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं अब भी प्राथमिकता बनी हुई हैं.

स्थानीय समस्याएं: ई20 एथेनॉल, महंगाई, नीट पेपर लीक और युवाओं की बेरोजगारी जैसे मुद्दे जनता के बीच चर्चा में हैं.

भ्रष्टाचार और कार्यकर्ताओं का सम्मान: कार्यकर्ताओं की उपेक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं. असोथर में विद्युत समस्या को लेकर मंडल अध्यक्ष को धरना देना पड़ा. वहीं बिंदकी में एक भाजपा कार्यकर्ता से पुलिस मारपीट का मामला सामने आया.

मुख्यमंत्रियों के बयान पर राजनीति

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर भी चर्चा हुई जिसमें उन्होंने सदर विधानसभा के पूर्व विधायक को लेकर कहा था कि 'यदि वे जीतते तो विकास कई गुना होता.' इस पर विपक्षी विधायकों और विश्लेषकों का कहना है कि विकास की निधि और प्रशासनिक व्यवस्था सरकार के हाथ में होती है.

जातीय समीकरण और टिकट में बदलाव की सुगबुगाहट

जातिवाद का प्रभाव: फतेहपुर की राजनीति में 70 से 75 प्रतिशत चुनाव जातीय गणित पर आधारित रहता है. कुर्मी, मुस्लिम, लोधी, निषाद, पटेल और क्षत्रिय मतदाता यहां निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

चेहरे बदलने की चर्चा: विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा 2027 में अपने वर्तमान विधायकों के चेहरे या विधानसभा क्षेत्र में बदलाव नहीं करती है तो उसे नुकसान उठाना पड़ सकता है. जहानाबाद और खागा जैसी सीटों पर उम्र या नए समीकरणों के तहत प्रत्याशी बदले जाने की कयासबाज़ी है.

सपा और पीडीए का असर: सपा अपने पीडीए फॉर्मूले के दम पर आक्रामक रुख अपनाए हुए है. सदर विधायक चंद्र प्रकाश लोधी के पक्ष में मुस्लिम और लोधी मतदाताओं का मजबूत ध्रुवीकरण देखा जा रहा है.

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