यूपी में चुनावों से पहले कांग्रेस को झटके, बुंदेलखंड के बड़े नेताओं ने थामा एसपी का दामन

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उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर एक तरफ कांग्रेस की यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी, पार्टी के संगठन में जान फूंकने की कोशिश कर रही हैं तो वहीं दूसरी ओर दिग्गज कांग्रेसी पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी का रुख करते दिख रहे हैं. बुंदेलखंड के दिग्गज कांग्रेसियों द्वारा अचानक से पार्टी को अलविदा कहते हुए समाजवादी पार्टी (एसपी) का दामन थाम लेने से कांग्रेस को जोरदार झटका लगा है. आपको बता दें कि एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 1 अक्टूबर को बुंदेलखंड के 3 बड़े कांग्रेसी नेताओं को पार्टी में शामिल करवाया.

एसपी की सदस्यता लेने वाले ये हैं वो 3 कांग्रेसी नेता 1. हमीरपुर से गयादीन अनुरागी 2. महोबा से मनोज तिवारी 3. उरई से विनोद चतुर्वेदी

कौन हैं गयादीन अनुरागी?

गयादीन अनुरागी ने अपने चुनावी सफर की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) से की थी. 2012 में उन्होंने कांग्रेस की टिकट पर हमीरपुर जिले की राठ विधान सभा सीट पर चुनाव लड़ा. इस चुनाव में गयादीन अनुरागी करीब एक लाख से अधिक वोटों से चुनाव जीत कर विधायक बने थे. 2017 के चुनाव में उन्हें बीजेपी की मनीषा अनुरागी ने करीब सवा लाख वोटों से हराया था. 2022 के चुनाव में कांग्रेसी से सपाई बने गयादीन अनुरागी एसपी की टिकट से किस्मत आजमा सकते हैं.

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महोबा जिले के दिग्गज कांग्रेसी मनोज तिवारी भी हुए सपाई

मनोज तिवारी के पिता बाबूलाल तिवारी महोबा विधानसभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर पांच बार विधायक रहे थे.उनके बेटे मनोज तिवारी भी अभी तक पिता की विरासत को संभाले कांग्रेस में डटे हुए थे. लेकिन अब उन्होंने समाजवादी पार्टी की सदस्यता लेकर सभी को चौंका दिया है.

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प्रियंका की सलाहकार समित का सदस्य थे विनोद चतुर्वेदी

बुंदेलखंड से कांग्रेस के कद्दावर नेता विनोद चतुर्वेदी कांग्रेस छोड़कर एसपी में शामिल हो गए हैं. चतुर्वेदी 3 बार कांग्रेस के जालौन जिलाध्यक्ष रहे. 2007 में वह उरई विधान सभा से कांग्रेस के विधायक चुने गए थे. हालांकि इसके बाद उन्होंने जालौन की माधौगढ़ सीट से दो बार कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन जीत नहीं सके.

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आपको बता दें कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष पद पर रह चुके विनोद चतुर्वेदी को हाल ही में प्रियंका गांघी की सलाहकार समिति का सदस्य नियुक्त किया गया था.

आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भले ही प्रियंका गांधी काफी सक्रिय हों लेकिन बीजेपी, बीएसपी और एसपी के अलावा अब उनके सामने उनकी पार्टी ही उन्हें चुनौती दे रही है. अब देखना ये अहम रहेगा कि आने वाले वक्त में प्रियंका कैसे संगठन को संभालकर पार्टी की नइया को पार लगाती हैं.

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