लेटेस्ट न्यूज़

स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे की ऊंचाहार सीट पर पेंच, अखिलेश यादव को याद दिलाया पुराना 'वादा'

यूपी तक के खास शो 'आज का यूपी' में देखिए स्वामी प्रसाद मौर्य और अखिलेश यादव के बीच ऊंचाहार सीट पर पेंच, बेटे के लिए याद दिलाया वादा और इंडिया गठबंधन में कांग्रेस की दोटूक. जानिए यूपी की 3 बड़ी खबरें.

ADVERTISEMENT

Swami Prasad Maurya and Akhilesh Yadav
Swami Prasad Maurya and Akhilesh Yadav
social share
Google CTA

उत्तर प्रदेश की राजनीति में रोजाना नए समीकरण बनते और बिगड़ते हैं. 'यूपी Tak' के विशेष न्यूज शो 'आज का यूपी' में आज हम राज्य की तीन बड़ी राजनीतिक और सामाजिक खबरों का गहराई से विश्लेषण कर रहे हैं. आज की पहली खबर है, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से जारी तल्खी के बीच स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे की ऊंचाहार सीट को लेकर बदले सुर और पुराना 'वादा'. दूसरा, इंडिया (INDIA) गठबंधन में स्वामी प्रसाद मौर्य की एंट्री पर कांग्रेस नेता आराधना मिश्रा 'मोना' का बड़ा बयान और तीसरे विकल्प के तौर पर ओवैसी व चंद्रशेखर से जुड़ने की अटकलें.  तीसरा, प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में इंडिया ब्लॉक के भीतर नेतृत्व और सीटों को लेकर सपा-कांग्रेस के बीच बनती नई रणनीतिक खींचतान. आइए, जानते हैं इन तीनों बड़ी खबरों का पूरा लेखा-जोखा विस्तृत रूप से.

ऊंचाहार सीट पर बेटे के लिए सॉफ्ट पड़े स्वामी प्रसाद मौर्य 

सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर दिए गए 'इग्नोर हिम' (उन्हें नजरअंदाज करो) वाले बयान से आहत होने के बावजूद, स्वामी प्रसाद मौर्य के तेवर अब बेटे के राजनीतिक भविष्य को लेकर कुछ नरम पड़ते दिख रहे हैं.

ऊंचाहार सीट का सियासी गणित: ऊंचाहार विधानसभा सीट से पूर्व में मनोज पांडे विधायक चुने गए थे, जो अब भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो चुके हैं. स्वामी प्रसाद मौर्य का दावा है कि पिछले चुनाव के दौरान अखिलेश यादव ने उनसे वादा किया था कि वे उनके बेटे के लिए आगे अवसर बनाएंगे और उसे एडजस्ट करेंगे.

दिल की बात और नाराजगी: मौर्य का कहना है कि वे स्वाभिमान से समझौता नहीं करेंगे और न ही सपा से गठबंधन की भीख मांग रहे हैं. लेकिन अगर अखिलेश यादव 'दरियादिली' दिखाएं तो राजनीति में पुरानी बातें पीछे छूट सकती हैं. वे आज भी अखिलेश के व्यक्तिगत व्यवहार से आहत हैं पर बेटे के भविष्य के लिए रास्ते खुले रखना चाहते हैं.

इंडिया गठबंधन में स्वामी की राहें आसान नहीं

आराधना मिश्रा 'मोना' का बयान: स्वामी प्रसाद मौर्य भले ही राहुल गांधी और कांग्रेस के जरिए इंडिया गठबंधन में शामिल होने का दावा कर रहे हों, लेकिन उत्तर प्रदेश कांग्रेस की वरिष्ठ नेता आराधना मिश्रा 'मोना' ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल स्वामी प्रसाद मौर्य गठबंधन का हिस्सा नहीं .

अखिलेश का कड़ा रुख: अखिलेश यादव पहले ही साफ कर चुके हैं कि स्वामी प्रसाद मौर्य के लिए सपा के दरवाजे बंद हैं. ऐसे में कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व भी सपा को नाराज करके मौर्य को गठबंधन में लेने का जोखिम उठाने से बचता दिख रहा है.

तीसरा विकल्प (ओवैसी और चंद्रशेखर): यदि इंडिया ब्लॉक के दरवाजे पूरी तरह बंद होते हैं तो स्वामी प्रसाद मौर्य अपनी अलग पार्टी के बैनर तले असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM) और चंद्रशेखर आजाद (आजाद समाज पार्टी) के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश में तीसरे मोर्चे के गठन की संभावनाओं पर विचार कर सकते हैं.

अपनी पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे मौर्य, कांग्रेस की लीडरशिप पर जताया भरोसा

सिंबल से कोई समझौता नहीं: स्वामी प्रसाद मौर्य ने साफ किया है कि वे भविष्य में जो भी चुनाव लड़ेंगे, वह केवल अपनी नई राजनीतिक पार्टी के चुनाव चिन्ह पर ही लड़ेंगे. वे किसी अन्य दल के सिंबल पर चुनाव मैदान में नहीं उतरेंगे.

कांग्रेस की भूमिका: मौर्य का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन की कमान कांग्रेस पार्टी के हाथों में है और भाजपा को हराने के लिए सभी विरोधी दलों को एकजुट होना चाहिए. उन्हें उम्मीद है कि कांग्रेस नेतृत्व ही गठबंधन के साथियों का फैसला करेगा.

सपा छोड़ने का मलाल: उन्होंने यह भी साझा किया कि रामचरितमानस और धार्मिक आडंबरों पर उनके बयानों के बाद पार्टी के भीतर जिस तरह से उन्हें रामगोपाल यादव जैसे नेताओं से बात करने के लिए कहा गया और अंततः अलग-थलग किया गया, उसी वजह से उन्होंने सपा छोड़ी थी.

ये भी पढ़ें: यूपी में एक और अफसर का इस्तीफा, GST डिप्टी कमिश्नर अनुपमा सरोज लड़ेंगी विधानसभा चुनाव?