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अखिलेश की सपा ने चाचा शिवापाल से ऐसा क्यों कहा कि अब आप स्वतंत्र हैं? जानिए क्या है माजरा

यूपी तक

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समाजवादी पार्टी (एसपी) के चीफ अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की अपने चाचा और प्रसपा प्रमुख शिवपाल सिंह यादव (Shivpal Singh Yadav) से दूरियां बढ़ती नजर आ रही हैं. अखिलेश यादव की एसपी से नाराज बताए जा रहे शिवपाल को एसपी की तरफ एक आधिकारिक लेटर आया है, जिसमें कहा गया है, “शिवपाल सिंह यादव जी, अगर आपको लगता है, कहीं ज्यादा सम्मान मिलेगा तो वहां जाने के लिए आप स्वंतत्र हैं.”

यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के परिणाम आने के बाद से ही शिवपाल कई बार अखिलेश और एसपी पर खुद की अनदेखी का आरोप लगा चुके हैं. शिवपाल की मानें तो उन्हें अखिलेश की एसपी में सम्मान नहीं मिल रहा है.

हाल ही में हुए राष्ट्रपति चुनाव में अखिलेश और शिवपाल के बीच दूरियां और बढ़ती नजर आईं. दोनों के बीच यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के बाद से फिर शुरू हुए मतभेद में राष्ट्रपति का चुनाव एक बार फिर नए पड़ाव के रूप में नजर आया.

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दरअसल, एसपी के विधायक शिवपाल सिंह यादव ने राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में वोट डाला था. शिवपाल ने दावा किया था कि राष्ट्रपति चुनाव में एसपी के खेमे से हुई क्रॉस वोटिंग उनके कहने पर ही हुई थी.

यूपी तक से बातचीत में शिवपाल ने कहा था,

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“राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने साल 1997 में नेताजी (मुलायम सिंह यादव) को आईएसआई एजेंट कहा था, तब हमने कहा था कि जो कट्टर समाजवादी होंगे वह इसका विरोध करेंगे, नेताजी का अपमान करने वाले का कभी सपोर्ट नहीं करेंगे. मेरी बात को कुछ लोगों ने माना और उन लोगों ने वोट (एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मूर्म के पक्ष में मतदान) किया.”

शिवपाल

18 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालने के बाद अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल पर आरोप लगाया था कि वह यशवंत सिन्हा पर पार्टी संरक्षक मुलायम सिंह यादव को आईएसआई का एजेंट कहने का आरोप लगाकर बीजेपी के इशारे पर काम कर रहे हैं.

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राष्ट्रपति चुनाव से पहले शिवपाल ने अखिलेश यादव को पत्र लिखकर कहा था कि सपा ने राष्ट्रपति चुनाव में उस व्यक्ति का समर्थन किया है, जिसने नेताजी (मुलायम सिंह यादव) का अपमान किया था.

शिवपाल ने मुलायम को प्रेरणा स्रोत बताते हुए कहा था कि जिसने उनके रक्षा मंत्रित्व काल में उन्हें पाकिस्तानी गुप्तचर संस्था आईएसआई का एजेंट बताया था, उसका समर्थन करना दुर्भाग्यपूर्ण हैं. शिवपाल ने यशवंत सिन्हा को वोट देने से इनकार करते हुए कहा था कि हम नेताजी का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे.

बता दें कि अखिलेश ने संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा का समर्थन देने का ऐलान किया था, तो वहीं एसपी के टिकट पर विधायक चुने गए शिवपाल ने एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को अपना समर्थन देने की घोषणा की थी.

साल 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद अपनी अलग पार्टी बनाने वाले शिवपाल और अखिलेश के बीच साल 2022 के विधानसभा चुनाव में नजदीकी हुई थी, लेकिन विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद दोनों के बीच फिर दूरी बढ़ने लगी.

ऐसे कई मौके सामने आए हैं, जब शिवपाल अखिलेश के नेतृत्व और कार्यशैली पर सवाल उठा चुके हैं. वहीं अखिलेश ने भी बीजेपी के इशारे पर काम करने के लिए अपने चाचा पर कई बार निशाना साधा है.

अब यह दूरी दोनों के बीच इतनी बढ़ गई है कि एसपी ने आधिकारिक तौर पर शिवपाल को दूसरे पार्टी में जाने तक की नसीहत दे दी है. अब एसपी के इस आधिकारिक लेटर पर शिवपाल का क्या एक्शन होता है, ये देखना दिलचस्प रहेगा.

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