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Opinion: मेरठ सेंट्रल मार्केट का ध्वस्तीकरण सपा के भ्रष्टाचार और कुशासन की देन, SC का निर्णय और योगी सरकार की मजबूरी

Meerut Central Market Sealing: मेरठ के शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माणों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बड़ी कार्रवाई। भावेष पांडेय का विश्लेषण कि कैसे पूर्ववर्ती सरकारों के भ्रष्टाचार का खामियाजा आज व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है।

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मेरठ का शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट एक समय शहर का प्रमुख व्यावसायिक केंद्र रहा, लेकिन आज यह अवैध निर्माणों, राजनीतिक संरक्षण और लंबे कानूनी विवाद का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है. सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद यहां 44 अवैध व्यावसायिक इकाइयों की सीलिंग और सैकड़ों अन्य संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तेज हो गई है. यह कार्रवाई कोई अचानक फैसला नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की परिणति है. 1980 के दशक के अंत में आवास विकास विभाग ने इस क्षेत्र में आवासीय प्लॉट आवंटित किए थे. लेकिन कुछ ही वर्षों में इन प्लॉटों पर बड़े पैमाने पर व्यावसायिक निर्माण शुरू हो गए-दुकानें, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, अस्पताल, स्कूल और बैंक तक बन गए. 1990 के आसपास ही शिकायतें और मुकदमे शुरू हुए, लेकिन उस समय की सरकारों ने इन अनियमितताओं पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की.