Opinion: ‘नकल माफिया’ की विरासत पर खड़े होकर सवाल? अखिलेश के आरोपों के बीच योगी सरकार के 9 साल का शिक्षा मॉडल
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के आरोपों के बीच यूपी की शिक्षा व्यवस्था में आए बदलावों पर एक विश्लेषण. पिछले 9 वर्षों में 'नकल माफिया' और 'पर्ची-खर्ची' के दौर को पीछे छोड़, योगी सरकार ने ऑपरेशन कायाकल्प, पारदर्शी शिक्षक भर्ती और अटल आवासीय विद्यालयों के जरिए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है.
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी नई नहीं है. लेकिन कुछ बयान ऐसे होते हैं जो केवल सुर्खियां नहीं बनाते, बल्कि अपने आप में कई सवाल भी खड़े कर देते हैं. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई आरोप लगाए. लेकिन, इन आरोपों को सुनते समय यह सवाल स्वतः उठता है कि क्या वे उस अतीत को पूरी तरह भूल चुके हैं. जब उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था ‘नकल माफिया’, ‘पेपर लीक’ और ‘पर्ची-खर्ची’ जैसे शब्दों के साथ जुड़कर पहचानी जाती थी. आज जिस व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वही व्यवस्था पिछले 9 वर्षों में बुनियादी ढांचे, पारदर्शिता और तकनीक आधारित सुधारों के माध्यम से एक नए ढांचे में ढलती हुई दिखाई देती है. इसलिए यह तुलना केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि वास्तविकताओं के आधार पर भी जरूरी हो जाती है.