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पश्चिमी UP में कांग्रेस के बड़े जाट नेता ने पार्टी को अलविदा कहा, SP में जाने की अटकलें

कुमार अभिषेक

19 अक्टूबर को एक तरफ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने पार्टी को मजबूत करने के लिए महिला भागीदारी को लेकर लखनऊ में बड़ा ऐलान किया,…

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19 अक्टूबर को एक तरफ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने पार्टी को मजबूत करने के लिए महिला भागीदारी को लेकर लखनऊ में बड़ा ऐलान किया, वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का एक ‘किला’ टूट गया.

प्रियंका ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया, ”हमने तय किया है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को देगी.” उधर कुछ घंटे बाद ही मुजफ्फरनगर में कांग्रेस के बड़े नेता हरेंद्र मलिक ने पार्टी को अलविदा कह दिया. सिर्फ कांग्रेस को हरेंद्र मलिक ने ही नहीं नहीं छोड़ा बल्कि उनके बेटे पंकज मलिक ने भी कांग्रेस छोड़ दी.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के बड़े जाट नेता के तौर पर हरेंद्र मलिक की पहचान थी, लेकिन हरेंद्र मलिक ने भी पार्टी छोड़ने का दिन वो चुना, जिस दिन कांग्रेस ने यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के लिए एक बड़ा ऐलान किया.

हरेंद्र मलिक पूर्व सांसद, प्रियंका गांधी के सलाहकार समिति के सदस्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के बड़े जाट नेता के तौर पर अपनी पहचान रखते थे.

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दरअसल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का नेतृत्व लगभग खाली होता जा रहा है. इमरान मसूद जो कि कांग्रेस के मुसलमानों के बड़े चेहरों में एक हैं, वह भी पार्टी को नसीहत दे चुके हैं कि कांग्रेस को समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करना चाहिए और कहीं ना कहीं यह भी संकेत दे चुके हैं कि वह भी पार्टी को छोड़ सकते हैं ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का कोई बड़ा नेता ऐसा नहीं बचा है, जिसका अपना बड़ा जनाधार हो.

कांग्रेस पार्टी किसानों को लेकर काफी मुखर रही है, किसान आंदोलन से जुड़े मुद्दे उठाती रही है, केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों का विरोध करती रही है, इसके बावजूद उसके जाट नेता जमीनी हकीकत भांपते हुए और 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी छोड़कर जा रहे हैं.

सूत्रों के मुताबिक जल्द ही पिता-पुत्र हरेंद्र मलिक और पंकज मलिक समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते हैं. हरेंद्र मलिक के पार्टी छोड़ने की चर्चा कुछ दिनों से चल रही थी और कांग्रेस नेतृत्व को भी इस बात का आभास था. वजह साफ है 2022 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी बाकी दलों, खासकर बीजेपी की तुलना में कमजोर दिख रही है.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एसपी और आरएलडी का गठबंधन भी मजबूत होता नजर आ रहा है. ऐसी स्थिति में हरेंद्र मलिक और उनके बेटे पंकज मलिक इस चुनाव में कोई चांस लेने को तैयार नहीं थे. कांग्रेस और एसपी का गठबंधन नहीं होगा, यह भी तय हो चुका है. ऐसी स्थिति में जमीनी चुनावी हकीकत भागते हुए कांग्रेस के बड़े नेता ने पार्टी को अलविदा कह दिया है.

एक तरफ प्रियंका गांधी पार्टी में जान फूंकने में लगी हैं, दूसरी तरफ जनाधार वाले नेता चुनावी मजबूरी देखते हुए दूसरी पार्टियों का रुख कर रहे हैं. ऐसे में कांग्रेस के लिए चुनाव से पहले अपने नेताओं को रोकना एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है.

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