रामपुर: पसमांदा मुसलमानों के सहारे UP में अपने सबसे कमजोर दुर्ग को मजबूत करने में जुटी BJP

रामपुर: पसमांदा मुसलमानों के सहारे UP में अपने सबसे कमजोर दुर्ग को मजबूत करने में जुटी BJP
फोटो - आमिर खान

Rampur by- Election 2022: पहली बार यूपी में भाजपा 5 दिसंबर को होने वाले रामपुर और खतौली विधानसभा उपचुनाव में आक्रामक रूप से मुस्लिम मतदाताओं को लुभा रही है. जहां खतौली में जाट और मुस्लिम समीकरण पार्टी को फायदा दे सकता है तो वही मुस्लिम-बहुल क्षेत्र रामपुर सदर में लगभग 3.80 लाख मतदाताओं में से 55 प्रतिशत मुस्लिम समुदाय से हैं. इन दोनों सीटों पर बीजेपी के नेता पसमांदा मुसलमानों को लुभाने की कवायद में लगे हुए हैं. जिसको लेकर प्रचार और संवाद जोरों पर है. इस उपचुनाव में पार्टी ने अपने अभियान में कई मुस्लिम नेताओं को तैनात किया है. जो जमीनी स्तर पर वे राज्य में मदरसों का सर्वेक्षण कराने के योगी सरकार के फैसले पर सवालों का सामना कर रहे हैं.

अहम बिंदु

मुस्लिम समुदाय मदरसों के सर्वेक्षण के बारे में सवाल पूछ रहे हैं, जब हम उनसे भाजपा को वोट देने के लिए कहते हैं और उन्हें यह बताने की कोशिश करते हैं कि भाजपा सरकार उनके कल्याण के लिए काम कर रही है. उन्हें अभी भी मदरसा सर्वेक्षण के संबंध में सरकार की मंशा के बारे में भ्रम दिख रहा है.

पसमांदा मुस्लमानों से बीजेपी को आस

पार्टी सूत्रों के मुताबिक कार्यकर्ताओं को ऐसे सवालों का शांति से जवाब देने और मतदाताओं को समझाने के लिए कहा गया है कि सर्वेक्षण किया जा रहा है क्योंकि सरकार चाहती है कि मदरसों के छात्रों को भी आधुनिक शिक्षा मिले और वे इंजीनियर और आईएएस अधिकारी के रूप में अपना करियर बनाए. राज्य सरकार ने 30 अगस्त को जिलाधिकारियों को गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वेक्षण करने का निर्देश था जो 10 सितंबर को शुरू हुआ और लगभग 8,500 मदरसे राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त किए बिना काम कर रहे पाए गए हैं

वहीं बीजेपी रामपुर और खतौली के उपचुनाव में इस बार वह सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ी मुस्लिम जातियों के लिए अपने पसमांदा संवाद कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर लाने की कोशिश कर रही है. बीजेपी नेता ये दावा कर रहे हैं कि यूपी में तीन करोड़ से अधिक पसमांदा मुसलमानों को मुफ्त राशन मिला है, 1.25 लाख से अधिक को आयुष्मान कार्ड का लाभ मिला है, 75 लाख को पीएम किसान सम्मान निधि मिली है, 40 लाख से अधिक को मुफ्त बिजली कनेक्शन मिला है, 20 लाख मकान मिले हैं.

बीजेपी का है ये प्लान

यहां तक ​​कि पार्टी ने हाल ही में रामपुर में पसमांदा मुसलमानों का एक सम्मेलन आयोजित किया, जिसे उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, यूपी सरकार में राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी और पार्टी के अल्पसंख्यक विंग के अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने संबोधित किया था, अब बासित समेत अन्य नेता घर-घर जाकर प्रचार कर रहे हैं. आजतक से बातचीत में बासित अली ने कहा पसमांदा मुसलमान को लेकर के बीजेपी सरकार ने सबसे ज्यादा काम किया है और उसी को बताते हुए इस समुदाय को जोड़ने की कवायत है.

भाजपा अल्पसंख्यक विंग के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने कहा कि अलग अलग जिलों के विंग के 200 से अधिक नेता क्षेत्र में डेरा डाले हुए हैं और घर-घर जाकर भाजपा उम्मीदवार के लिए प्रचार कर रहे हैं. हमें यकीन है कि सरकारी योजनाओं के लाभार्थी मुस्लिम मतदाताओं का एक अच्छा हिस्सा उपचुनाव में भाजपा को वोट देगा। हम उनसे बात कर रहे हैं और उनके सवालों का जवाब दे रहे हैं.

वहीं पसमांदा मुसलमानों के एक करने में लगे यूपी के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने आज तक से कहा कि समाज को सबसे ज्यादा फायदा मोदी और योगी सरकार की योजनाओं का हुआ है और सरकार ने बिना भेदभाव के हर वर्ग के लिए काम किया है. पिछली सरकारों ने जहां केवल राजनीतिक हित के लिए इनका इस्तेमाल किया वहीं बीजेपी ने मुख्यधारा में लाकर इन्हें इनका हक दिलाना चाहती है. जिसको लेकर विपक्ष की चिंता है जो केवल वोट बैंक की तरह अभी तक पसमांदा मुसलमानों का इस्तेमाल करते रहे जो किसी का अधिकार नहीं है. वहीं मदरसों के विषय में कानून संगत प्रक्रिया जारी रहेगी.

विपक्ष का भाजपा पर वार

वहीं कांग्रेस पार्टी ने इसे बीजेपी का दोबारा चेहरा करार दिया है. कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कहा की एक तरफ अल्पसंख्यक पसमांदा मुसलमानों की हित की बात करते हुए पार्टी अभियान चलाती है तो वहीं दूसरी तरफ सर्वेक्षण और गैर मान्यता प्राप्त मदरसों पर कार्रवाई का डर दिखाकर अपना एजेंडा सेट कर यह बीजेपी की दोहरी मानसिकता को दिखाता है जो प्रदेश का माहौल खराब कर रही है. पार्टी की रणनीति पर मतदाता भ्रमित नहीं होगा और बीजेपी को इस रणनीति का कोई फायदा उपचुनाव में नहीं मिलेगा.

इस मुद्दे पर राजनीतिक विश्लेषक रतनमणि लाल भी मानते हैं यूपी के खतौली और रामपुर के उपचुनाव बीजेपी समेत समाजवादी पार्टी के लिए भी एक बड़ा चुनाव है. हाल के दिनों में जिस तरीके से गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे की कार्रवाई की बात हुई उसके बाद अब उपचुनाव के माहौल में सरकार और प्रशासन इसमें ढील बरतता नजर आ रहा है. जिससे यह समझा जा सकता है कि इन दोनों सीटों पर इसका समीकरण पर प्रभाव पड़ सकता है जिसके चलते पार्टी फिलहाल मदरसों पर कार्रवाई के फैसले पर बैकफुट पर नजर आ रही है.

जहां एक तरफ रामपुर और खतौली में अल्पसंख्यक विंग के उन वरिष्ठ नेताओं और अन्य कार्यकर्ताओं को प्रचार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसे चार मंडल इकाइयों में विभाजित किया गया है तो वहीं इस साल की शुरुआत में हुए उपचुनावों में रामपुर और आजमगढ़ दोनों लोकसभा सीटों पर जीत हासिल करने के बाद सत्तारूढ़ पार्टी को उपचुनाव जीतने का भरोसा है. अब पार्टी पसमांदा मुसलमान का कार्ड खेलते हुए इन दोनों सीटों पर बीजेपी अपने आप को मजबूत करने की कवायद में दिख रही है.

बीजेपी ने बड़ी तोपों को तैनात किया है जबकि सपा का शीर्ष नेतृत्व मैनपुरी उपचुनाव में व्यस्त है. लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद से लेकर कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, मंत्री बलदेव सिंह औलख, धर्मपाल सिंह, दानिश आजाद अंसारी और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी पूरी ताकत से लगे हैं तो वहीं सीएम योगी आदित्यनाथ दो दिसंबर को रामपुर और 30 नवंबर को खतौली में जनसभा को संबोधित करेंगे. वहीं अनुमान है कि प्रचार खत्म होने से पहले कम से कम एक दर्जन और मंत्री रामपुर और खतौली का दौरा करेंगे.

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