Opinion: क्या 6 घंटे स्कूल यूनिफॉर्म पहनने से कमजोर हो जाएगी आस्था? समझिए इलाहाबाद HC के फैसले के क्या हैं मायने
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल में हिजाब की मांग वाली याचिका खारिज कर स्पष्ट संदेश दिया है कि यूनिफॉर्म नियम और अनुशासन सर्वोपरि हैं. कोर्ट के अनुसार, हिजाब पहनना इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है और स्कूल में ड्रेस कोड का पालन करने से किसी की आंतरिक आस्था कमजोर नहीं होती.
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Allahabad High Court Hijab Case (Photo: AI Generated)
Opinion: धर्म मनुष्य को भीतर से बेहतर बनने की प्रेरणा देता है. उसकी वास्तविक शक्ति विश्वास, नैतिकता, आत्मसंयम और आंतरिक आस्था में निहित होती है.किसी धर्म की पहचान को किसी पहनावे या बाहरी प्रतीकों तक सीमित करना उसकी व्यापक और मानवीय भावना को संकुचित करना है. इस संदर्भ में हिजाब को भी व्यापक दृष्टिकोण से देखना आवश्यक है. कई अदालतों ने हिजाब को इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं माना है. इसलिए कोई छात्रा यदि अपने स्कूल में इसे पहनने की जिद करती है तो वह एक तरह से अनुशासन, समानता और सामूहिकता की भावना को चुनौती देती है.

