Opinion: सनातन संस्कृति का अद्भुत मर्म है कांवड़ यात्रा, जानें इसकी शुरुआत, इतिहास और धार्मिक महत्व
श्रावण मास में निकाली जाने वाली कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सनातन आस्था का प्रतीक मानी जाती है. समुद्र मंथन, रावण, परशुराम और श्रवण कुमार से जुड़ी मान्यताओं के साथ यह यात्रा आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की भागीदारी वाला विशाल आयोजन बनी हुई है.
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Opinion: श्रावण मास शुरू हो चुका है और इसी के साथ उत्तर प्रदेश में विशेष तौर पर पश्चिमी जिलों में भगवा वस्त्रधारी कांवड़िए सड़कों पर दिखाई देने लगे हैं. कंधों पर कांवड़, उसमें लटकते गंगाजल के पात्र, ‘बोल बम’ और ‘हर हर महादेव’ के उद्घोष से गूंजती सड़कें. भारतीय लोक आस्था का जीवंत दृश्य उपस्थित हो चुका है. यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, सनातन भावनाओं का संगम है जो शिव को केंद्र में रखकर एकाकार हो उठता है. श्रद्धा-आस्था के इस पर्व का महत्व योगी सरकार समझती है और यही कारण है कि औघड़दानी के इन उपासकों के समक्ष पूरी प्रदेश सरकार नतमस्तक है. ड्रोन निगरानी से लेकर हेलीकॉप्टर से पुष्प-वर्षा तक, अस्थायी अस्पतालों से लेकर हजारों किलोमीटर मार्ग की मरम्मत तक. सत्ता के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन, सामाजिक पहचान और जन आस्था प्रति अपना सम्मान प्रदर्शित करने का एक बड़ा मंच है. एक लोक कल्याणकारी पीठ का महंत होने के नाते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की श्रद्धा भी इन कांवड़ियों के प्रति खुलकर सामने आती है और इसके निहितार्थ भी हैं. इस निहितार्थ को समझने के लिए सबसे पहले इस परंपरा की जड़ों को समझना जरूरी है.
