Opinion: अयोध्या में संजीवनी तलाशते 'आउटडेटेड' नेता, क्या आस्था के मुद्दे पर हो रही है सियासी रीलॉन्च की कोशिश?
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र में चढ़ावा चोरी प्रकरण उन राजनेताओं को ‘सियासी संजीवनी’ की तरह दिखाई दे रहा है, जो लगातार खिसकते जनाधार की वजह से हाशिये पर जा चुके हैं.
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राम मंदिर सीईओ के लिए आ चुके 2300 से ज्यादा आवेदन. (Photo: ITG)
Opinion: भारतीय राजनीति में जब भी कोई बड़ा मुद्दा गरमाता है, तो कैमरों की चकाचौंध से दूर हो चुके और राजनीतिक रूप से हाशिये पर जा चुके नेताओं की उम्मीदें अचानक हिलोरे मारने लगती हैं. ताजा उदाहरण अयोध्या चढ़ावा चोरी प्रकरण का है. श्रद्धा, आस्था और सुरक्षा से जुड़े इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर जहां एक तरफ जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे 'आउटडेटेड' चेहरे भी सक्रिय हो गए हैं, जो लंबे समय से मुख्यधारा की राजनीति में अपनी ज़मीन खो चुके हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि इन नेताओं के लिए यह प्रकरण जनसरोकार का विषय कम, और खुद को दोबारा प्रासंगिक बनाने का एक सुनहरा अवसर ज़्यादा बन गया है.
