Opinion: कौन लिख रहा है स्कूली बच्चों के प्रदर्शन की अदृश्य पटकथा? जानिए पर्दे के पीछे का पूरा खेल!
UP School Students Protest Conspiracy Analysis: उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 'ऑपरेशन कायाकल्प' से हुए सुधारों के बावजूद हाल में नाबालिग बच्चों का सड़कों पर उतरना, चक्का जाम करना और डीएम को बुलाने की हठ करना गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. क्या चुनाव से पहले मासूम बच्चों को 'ह्यूमन शील्ड' बनाकर राजनीतिक साजिश रची जा रही है?
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हम भी कभी जेन-अल्फा थे. हमारे जमाने के स्कूल तो बाबा-आदम के युग की ‘सुविधाओं’ वाले थे. बरसात में टपकती छतें, टूटा-फूटा फर्नीचर, न कंप्यूटर, न ढंग की प्रयोगशाला और न साफ-सुथरे टॉयलेट. स्मार्ट क्लासेज क्या होती हैं, हम जानते भी नहीं थे. कुछ था तो बस गुरुजनों के प्रति श्रद्धा और पिटाई के तौर पर नियमित मिलने वाला आशीर्वाद. फिर भी हम अपने स्कूल की समस्याओं को सड़क पर लाने के बजाय अपने हेडमास्टर पर भरोसा करते थे, और हमारी सुनवाई भी होती थी. इसके उलट आज उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों की तस्वीर में आमूल-चूल परिवर्तन दिखाई देता है. ऑपरेशन कायाकल्प ने इन स्कूलों को शिक्षा व सुविधाओं के स्तर पर प्राइवेट स्कूलों की टक्कर में खड़ा कर दिया है. कुछ स्थानों पर अवश्य दिक्कतें हो सकती हैं, लेकिन उनका समाधान अपने पैरेंट्स को बताकर स्कूल प्रबंधन से कराने का प्रयास करने के बजाय बच्चों का सीधे सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन करना कुछ और ही कहानी कह रहा है.
