अगस्त में ही लखनऊ पहुंचे CEC ज्ञानेश कुमार, क्या समय से पहले होंगे यूपी विधानसभा चुनाव?
UP Election 2027: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार लखनऊ के दो दिवसीय दौरे पर हैं. 25 अगस्त को करीब 500 BLO से संवाद करेंगे. ELC 2.0, ECINET और वोटर लिस्ट पर फोकस.
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को लेकर चुनाव आयोग की सक्रियता बढ़ती दिखाई दे रही है. मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार 24 और 25 अगस्त को लखनऊ के दो दिवसीय दौरे पर हैं. इस दौरान वह छात्रों, निर्वाचन अधिकारियों और बूथ लेवल अधिकारियों से संवाद करेंगे. 25 अगस्त को लखनऊ और आसपास के जिलों के करीब 500 BLO से उनकी सीधी बातचीत होगी.
उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 तक है. राज्य में विधानसभा चुनाव फरवरी-मार्च 2027 में होने हैं. ऐसे में सीईसी का लखनऊ दौरा राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है. हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से इस दौरे को चुनाव प्रक्रिया को जमीनी स्तर पर मजबूत करने, मतदाता जागरूकता बढ़ाने और चुनावी तैयारियों की समीक्षा से जोड़ा गया है.
सीईसी करेंगे 500 से ज्यादा BLO से सीधी बात
सीईसी ज्ञानेश कुमार 25 अगस्त को लखनऊ और आसपास के जिलों के करीब 500 बूथ लेवल अधिकारियों से संवाद करेंगे. BLO चुनावी मशीनरी और मतदाताओं के बीच अहम कड़ी होते हैं. मतदाता सूची को अपडेट करने, नए पात्र मतदाताओं का नाम जोड़ने और जमीनी स्तर पर सत्यापन जैसे कामों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. इस संवाद का फोकस मतदाता सूची प्रबंधन को बेहतर बनाने और जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं और सुझावों को समझने पर रहेगा.
ELC 2.0 और ECINET पर भी जोर
ज्ञानेश कुमार के दौरे में Electoral Literacy Clubs यानी ELC 2.0 और ECINET से जुड़ा क्षेत्रीय सम्मेलन भी शामिल है. इसका उद्देश्य स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के जरिए युवाओं और नए मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया से जोड़ना और उनमें मतदान को लेकर जागरूकता बढ़ाना है. लखनऊ में होने वाले सम्मेलन में 20 जिलों से जुड़े 440 शैक्षणिक संस्थानों के करीब 1,500 विद्यार्थी, शिक्षक और अन्य लोग शामिल होने वाले हैं.
आयोग की ओर से चुनाव प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों को लाइव डेमो के जरिए समझाने और ECINET के डिजिटल इकोसिस्टम से परिचित कराने की भी व्यवस्था की गई है.
अपने पुराने कॉलेज भी पहुंचे ज्ञानेश कुमार
दौरे के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार लखनऊ के अपने पुराने कॉलेज कोल्विन तालुकदार कॉलेज भी पहुंचे. यहां उन्होंने छात्रों के साथ बातचीत की. बातचीत में चुनावी प्रक्रिया, EVM, फेक न्यूज और युवा मतदाताओं की भूमिका जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई. ज्ञानेश कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश के स्कूलों और विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों को चुनावी प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता समझाने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
क्या समय से पहले होंगे यूपी विधानसभा चुनाव?
सीईसी के लखनऊ दौरे के साथ ही राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यूपी विधानसभा चुनाव तय समय से पहले हो सकते हैं. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस दौरे को चुनाव प्रक्रिया की नियमित तैयारी और समीक्षा का हिस्सा बताया गया है. इससे पहले ज्ञानेश कुमार साफ कर चुके हैं कि यूपी विधानसभा चुनाव समय पर होंगे और विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 तक है.
यानी फिलहाल सीईसी के इस दौरे को समय से पहले चुनाव की घोषणा का संकेत मानने की कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है. आयोग चुनावी प्रक्रिया की तैयारियों में लगातार जुटा रहता है.
2017 के चुनाव से पहले भी हुआ था ऐसा दौरा
उत्तर प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनावों से पहले भी निर्वाचन आयोग की टीम चुनाव से काफी पहले राज्य का दौरा कर चुकी है. 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए तत्कालीन मुख्य निर्वाचन आयुक्त सैयद नसीम अहमद जैदी के नेतृत्व में आयोग की टीम ने 26 और 27 सितंबर 2016 को लखनऊ का दौरा किया था. इससे पहले 20-21 सितंबर 2016 को उप निर्वाचन आयुक्त विजय देव ने भी राज्य की प्रारंभिक तैयारियों का जायजा लिया था.
उस दौरान आयोग ने राजनीतिक दलों, प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों समेत चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पक्षों के साथ बैठकें की थीं.
2022 चुनाव से पहले भी आयोग ने किया था दौरा
इसी तरह 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग की टीम ने 28 से 30 दिसंबर 2021 तक लखनऊ का तीन दिवसीय दौरा किया था. तत्कालीन मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील चंद्रा के नेतृत्व में आयोग ने राजनीतिक दलों के साथ बैठकें की थीं और कोविड प्रोटोकॉल के बीच समय पर चुनाव कराने की तैयारियों की समीक्षा की थी.
ऐसे में इस बार अगस्त में ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त के लखनऊ पहुंचने और करीब 500 BLO से सीधे संवाद करने को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जरूर तेज हैं. हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से इस दौरे का मुख्य जोर चुनावी मशीनरी, मतदाता सूची, डिजिटल व्यवस्था और नए मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया से जोड़ने पर बताया गया है.
