Opinion: योगी आदित्यनाथ में ऐसा क्या है जो किसी और नेता में नहीं? 'विकास+विरासत' मॉडल की होगी अग्निपरीक्षा
उत्तर प्रदेश की 2027 के चुनावी जंग में योगी आदित्यनाथ की सख्त प्रशासक, कानून-व्यवस्था, विकास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी छवि बीजेपी के लिए बड़ा राजनीतिक आधार बन सकती है. लेखक ने इस लेख में लिखा है कि कैसे सत्ता में वापसी का फैसला सरकार के कामकाज, संगठन की सक्रियता, जनसंपर्क और जमीनी मुद्दों पर जनता के रुख से तय होगा.
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Opinion: राजनीति में प्रायः चुनावी अंकगणित, जातिगत गोलबंदी, क्षेत्रीय समीकरण और घोषणापत्रों के बड़े-बड़े दावे ही जीत-हार का मुख्य आधार माने जाते हैं. चुनावी मंचों से गूंजने वाले नारों, रैलियों में उमड़ती भीड़ और मीडिया के विश्लेषकों की बहसों का अपना एक निश्चित गणितीय हिसाब होता है. परंतु इतिहास साक्षी है कि जब किसी राज्य के राजनीतिक क्षितिज पर कुछ ऐसी अभूतपूर्व संरचनाएं और सांस्कृतिक प्रतीक उभर आते हैं, तो उन्हें केवल आंकड़ों के पारंपरिक तराजू पर नहीं तौला जा सकता. उत्तर प्रदेश का आगामी चुनावी संग्राम जब-जब आकार लेगा, तब-तब एक मौलिक और यक्ष प्रश्न सतह पर आएगा—आखिर वह क्या है, जो इस विशाल प्रदेश में केवल योगी आदित्यनाथ कर सकते हैं, कोई अन्य राजनेता नहीं?

