UP की सड़कों का रिएलिटी चेक: ‘यह सड़क 2013 से ही है बेहाल’, PM के क्षेत्र वाराणसी का हाल

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उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अब तक के अपने करीब साढ़े चार साल के कार्यकाल में कई बार प्रदेश की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने की बातें कही हैं. अलग-अलग वक्त पर इसके लिए समयसीमाएं भी तय की गईं. अब एक बार फिर विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही योगी सरकार ने 15 नवंबर तक प्रदेश की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं.

मगर मौजूदा वक्त में यूपी की सड़कों का असल हाल क्या है, यह जानने के लिए यूपी तक सड़कों का रिएलिटी चेक लेकर आया है. इस रिएलिटी चेक सीरीज में हम प्रदेशभर की सड़कों की पड़ताल करेंगे और तमाम सराकारी दावों के बीच सही तस्वीर सामने रखेंगे. इस कड़ी में आज पेश है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की सड़कों का हाल:

यूपी तक की टीम ने सबसे पहले वाराणसी को आजमगढ़ से जोड़ने वाली पांडेयपुर की सड़क का जायजा लिया. इस सड़क की बदहाली के चलते आम लोगों से लेकर व्यापारी तक परेशान हैं.

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पांडेयपुर व्यापार मंडल के अध्यक्ष मनीष गुप्ता ने बताया, ”यह सड़क वाराणसी उत्तर विधानसभा में आती है, जिसके विधायक रविंद्र जायसवाल हैं और वह योगी सरकार में मंत्री भी हैं.”

मनीष गुप्ता का दावा है कि यह सड़क साल 2013 से लगातार खराब ही रही है, कभी बनी भी तो एक-दो महीने से ज्यादा नहीं चल पाई.

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गुप्ता का आरोप है कि यहां भ्रष्टाचार का बोलबाला है, जिसका खामियाजा आम लोगों को उठाना पड़ रहा है, खराब सड़क का असर व्यापार पर भी पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि दो साल से मंत्री रविंद्र जायसवाल का आश्वासन मिलता आ रहा है कि पैसा पास हो गया है, सड़क सही हो जाएगी, लेकिन कुछ हुआ नहीं.

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इस सड़क की देखरेख की जिम्मेदारी पहले नेशनल हाइवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की थी, लेकिन पिछले 2 साल से इसका जिम्मा लोक निर्माण विभाग (PWD) के पास है.

सड़क की बदहाली को लेकर बीजेपी विधायक रविंद्र जायसवाल का कहना है कि तारकोल की सड़कों का पानी दुश्मन होता है, जिसके चलते सड़कें डैमेज होती हैं. उन्होंने कहा, ”इस बार बारिश अच्छी हुई है. जिस वजह से बाढ़ भी आई थी. इस वजह से पुरानी सड़कों में गड्ढे हुए हैं.

वहीं, वाराणसी क्षेत्र के PWD के मुख्य अभियंता संजय कुमार तिवारी ने दावा किया कि सड़कों के नवीनीकरण की साइकिल के तहत मरम्मत का काम जरूर होता है, जिसमें स्टेट हाइवे और MDR पर चार साल, ODR पर पांच साल और ग्रामीण मार्गों पर 8 साल में नवीनीकरण जरूर होता है, अगर इसके अलावा भी कोई प्रकरण आता है तो उस पर कार्रवाई जरूर होगी.

”जहां तक पांडेयपुर से आजमगढ़ मार्ग की बात है तो इसका जिम्मा दो साल पहले ही NHAI से PWD को मिला था और सड़क की हालत बहुत खराब थी. गंगा प्रदूषण (नियंणत्र विभाग) ने पाइपलाइन डाली थी और रीस्टोरेशन भी उन्हें ही करना था, लेकिन उन्होंने मानक के अनुसार रीस्टोरेशन नहीं कराया था, जिसके चलते सड़क पर गड्ढा हुआ है और बरसात की वजह से और क्षति हुई है. अभी शीघ्र उस पर काम शुरू करने जा रहे हैं.”

संजय कुमार तिवारी, मुख्य अभियंता, PWD, वाराणसी

यह तो हुई एक बड़ी सड़क की बात, अब कुछ और स्थानीय सड़कों का हाल भी जान लेते हैं. जब हम वाराणसी के पीलीकोठी इलाके में पहुंचे, तो वहां भी सड़क खस्ताहाल में दिखीं.

बारिश का मौसम लोगों को भले ही सुहाना लगता हो, लेकिन पीलीकोठी इलाके के लोगों को यह मौसम सताने वाला लगता है क्योंकि इस इलाके की सड़क पर भी गड्ढे काफी हैं. इसके चलते आए दिन दुर्घटनाएं होना, लोगों को चोट लगना और गंदगी होना यहां आम बात है.

यहां हाजी रामतुल्ला अंसारी नाम के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया, ”हमारे क्षेत्र में क्या पूरे बनारस में ही स्थिति यही है कि जरा सी बारिश होने पर सड़कों पर चलना दूभर हो जाता है. जब परिवार के लोग घर से निकलते हैं तो चिंता सताती रहती है कि कब वापस लौटेंगे, सुरक्षित लौटेंगे या एक्सीडेंटल होकर.”

पीलीकोठी से कुछ कदम पर आदमपुर थाना है. जिसके ठीक सामने की सड़क भी खस्ताहाल है. अब जरा उस सड़क का भी हाल देख लीजिए जो शहर के कज्जाकपुरा में लंबे समय से बन रहे फ्लाईओवर के नीचे है.

इससे ज्यादा बुरी हालत सारनाथ के ग्रामीण इलाके से शहर के हिस्से को जोड़ने वाली PWD की राष्ट्रीय राजमार्ग की सड़क की है. यहां भी दुर्घटनाएं और मुसीबत को झेलना लोगों के लिए लगभग रोज की बात हो गई है.

सारनाथ इलाके में वसीम नाम के एक शख्स ने सड़कों की हालत को लेकर कहा, ”सड़कों की हालत हर दिन खराब होती चली जा रही है. सड़कें टूटती हैं तो उनके बनने की नौबत बहुत बाद में आती है, काफी गड्ढे हो जाने के बाद.”

इस बीच, वाराणसी क्षेत्र के PWD के मुख्य अभियंता संजय कुमार तिवारी का कहना है कि बनारस में 658 किलोमीटर सड़क के लिए गड्ढा मुक्ति का काम होना है और 182 किलोमीटर सड़क का नवीनीकरण होना है.

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