'ज्ञानवापी को दूसरी बाबरी बनाने की कोशिश', श्रृंगार गौरी पर काशी में राजनीतिक घमासान तेज

'ज्ञानवापी को दूसरी बाबरी बनाने की कोशिश', श्रृंगार गौरी पर काशी में राजनीतिक घमासान तेज
फोटो: फिरोज अली/ इंडिया टुडे

वाराणसी के ज्ञानवापी और श्रृंगार गौरी परिसर में अदालत के आदेश पर शुक्रवार को एडवोकेट कमिश्नर की अगुवाई में एक टीम ने ज्ञानवापी मस्जिद के बाहर के कुछ हिस्सों का वीडियोग्राफी-सर्वे किया. वादी पक्ष के वकील के मुताबिक, आज यानी शनिवार को बैरिकेडिंग (ज्ञानवापी मस्जिद परिसर) के अंदर सर्वे कराया जाएगा. वहीं, इस मामले को लेकर सूबे में राजनीति तेज हो गई है. कांग्रेस और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं के बीच वार-पलटवार का सिलसिला जारी है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि 'वाराणसी में ज्ञानवापी को दूसरी बाबरी बना माहौल बिगाड़ने की साजिश चल रही है'. वहीं, दूसरी तरफ बीजेपी ने कांग्रेस पर कोर्ट के आदेश को नहीं मानने का आरोप लगाया है.

जानें बीजेपी-कांग्रेस ने एक दूसरे को लेकर क्या कहा?

कांग्रेस नेता बोले- 'ज्ञानवापी को दूसरी बाबरी बनाने की कोशिश'

शृंगार गौरी मंदिर मामले में बनारस के ज्ञानवापी परिसर के अंदर सर्वे और वीडियोग्राफी के आदेश को यूपी कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष शाहनवाज आलम ने राजनीतिक और स्थापित कानून के विरुद्ध फैसला करार देते हुए इसे बनारस का माहौल बिगाड़ने के लिए न्यायपालिका के एक हिस्से के दुरूपयोग का उदाहरण बताया है.

कांग्रेस मुख्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति में आलम ने कहा, "बनारस के ज्ञानवापी मस्जिद को दूसरा बाबरी मस्जिद बना कर पूर्वांचल का माहौल बिगाड़ने की कोशिश आरएसएस लंबे समय से कर रही है. इस खेल में उसने न्यायपालिका के एक हिस्से को भी शामिल कर लिया है, जो सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट तक के फैसलों की अवमानना करने से नहीं हिचक रहा है."

उन्होंने कहा, "सर्वे और वीडियोग्राफी का यह आदेश 1991 के पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम का उल्लंघन है, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि 15 अगस्त 1947 तक धार्मिक स्थलों का जो भी चरित्र था वो यथावत रहेगा, इसे चुनौती देने वाली किसी भी प्रतिवेदन या अपील को किसी न्यायालय, न्यायाधिकरण (ट्रीब्युनल) या प्राधिकार (ऑथोरिटी) के समक्ष स्वीकार ही नहीं किया जा सकता."

बीजेपी प्रवक्ता बोले- 'कांग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण का प्रयास कर रही'

बीजेपी प्रवक्ता ने कहा, "

प्लेसिस ऑफ वर्कशिप एक्ट 1991 का आसरा लेकर कांग्रेस पार्टी मुसलमानों का तुष्टिकरण करती रही है. आज उसके आश्रय पर फिर न्यायपालिका के निर्णय पर हस्तक्षेप करने का काम कर रही है. आज न्यायपालिका के निर्णय को गलत बताने का काम कर रही है. इस मुस्लिम तुष्टीकरण की पराकाष्ठा ने कांग्रेस की यह दशा की है."

राकेश त्रिपाठी

उन्होंने आगे कहा, "संविधान के द्वारा बनी हुई अदालतों के निर्णय के अनुपालन को सुनिश्चित करना, यह सरकार का भी दायित्व है. ज्ञानवापी मस्जिद के मामले में न्यायपालिका ने अगर कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर सर्वे करने आदेश दिया है, तो आपत्ति किस बात की?"

वहीं, बीजेपी प्रवक्ता मनोज शुक्ला ने कहा, "कांग्रेस शुरू से ही बहु संख्याको की आस्था से खिलवाड़ करती आई है. बहुसंख्यकों के जो प्रतीक स्थल हैं, आस्था के केंद्र हैं उनके खिलाफ लगातार उसका यही रवैया रहा है. ज्ञानवापी के प्रकरण पर कांग्रेस का यह बयान जो जारी हुआ है यह शाहनवाज आलम का बयान नहीं है, यह श्रीमती सोनिया गांधी, प्रियंका वाड्रा और राहुल गांधी के विचार हैं जो शाहनवाज आलम के माध्यम से व्यक्त किए गए हैं."

दारूल उलूम फिरंगी महल के मौलाना सुफियान निजामी ने कहा, "हम सभी लोगों ने देखा है कि इस मुल्क में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद के नाम पर लंबे वक्त तक सियासत की गई, जिसके नतीजे में हिंदू और मुसलमानों के बीच लंबी दूरियां पैदा हुईं. हम इस बात को समझते हैं कि ज्ञानवापी मस्जिद के सिलसिले में जिस तरह की सियासत हो रही है, जिस तरह से इस मसले को खत्म करने के नामपर अपने सियासी एजेंडे को पूरा करने की कोशिश की जा रही है, यह तमाम चीजें हमारे मुल्क के मुस्तकबिल के लिए और मुल्क के भाईचारे के लिए कतई तौर पर मुनासिब नहीं है."

उन्होंने आगे कहा, "जो लोग भी ज्ञानवापी मस्जिद के मसले को उठाकर अपने सियासी मकसद को हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, उन से मेरी गुजारिश है कि इस मुल्क ने मंदिर मस्जिद के नाम पर बड़े पैमाने पर विवाद देखा है. इस तरह की चीजों को आम लोगों के बीच लाकर फिर से उसी दिशा की तरफ मुल्क का जाना किसी भी तरह से मुनासिब बात नहीं होगी."

क्या है मामला?

अहम बिंदु

गौरतलब है कि विश्व वैदिक सनातन संघ के पदाधिकारी जितेन्द्र सिंह विसेन के नेतृत्व में राखी सिंह तथा अन्य ने अगस्त 2021 में अदालत में एक वाद दायर कर श्रंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन और अन्य देवी-देवताओं के विग्रहों की सुरक्षा की मांग की थी. सिविल जज (जूनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद गत 26 अप्रैल को अजय कुमार मिश्रा को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर ज्ञानवापी परिसर का वीडियोग्राफी-सर्वे करके 10 मई को अपनी रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था. मिश्रा ने वीडियोग्राफी और सर्वे के लिए छह मई का दिन तय किया था.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मामला संवेदनशील होने के कारण जिले की सभी थानों की पुलिस के साथ-साथ स्थानीय अभिसूचना इकाई को भी अतिरिक्त सतर्कता बरतने के आदेश दिए गए हैं.

(भाषा के इनपुट्स के साथ)

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