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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को आया अखिलेश यादव का फोन, भावुक होकर जो बात हुई और फिर ये प्लान बना सब जानिए

Akhilesh yadav call to Shankaracharya Avimukteshwarananda: अखिलेश यादव ने हाल ही में फोन पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से बात कर उनका समर्थन किया और सरकार पर निशाना साधा है. इस दौरान शंकराचार्य ने अखिलेश यादव से कहा कि 'मैं अपनी लड़ाई अभिमन्यु की तरह चक्रव्यूह में लड़ रहा हूं.'

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Akhilesh yadav call to Avimukteshwarananda
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Akhilesh yadav call to Shankaracharya Avimukteshwarananda: प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच झड़प का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. अब इस विवाद में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की एंट्री हो गई है. अखिलेश यादव ने हाल ही में फोन पर शंकराचार्य से बात कर उनका समर्थन किया और सरकार पर निशाना साधा है. इस दौरान  स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी भावकु होकर अपनी बात सामने रखी जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल है. 

'अभिमन्यु की तरह चक्रव्यूह में लड़ रहा हूं' 

सपा नेता संदीप यादव के माध्यम से हुई इस फोन कॉल में शंकराचार्य ने अपनी पीड़ा व्यक्त की. उन्होंने अखिलेश यादव से कहा 'मैं अपनी लड़ाई अभिमन्यु की तरह चक्रव्यूह में लड़ रहा हूं. एक हिंदू बच्चे को जन्म के साथ ही गंगा-यमुना में स्नान का अधिकार मिल जाता है.लेकिन मुझसे वह अधिकार छीन लिया गया.' शंकराचार्य ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर बड़ा आघात बताते हुए काशी का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि बनारस में 150 से ज्यादा मंदिर तोड़ दिए गए और प्रशासन अब भी झूठ बोल रहा है.

'आपके साथ बुरा व्यवहार हुआ'

शंकराचार्य की बातें सुनने के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर दुख जताया. उन्होंने कहा ये बहुत खराब लोग हैं. आपके साथ जो व्यवहार हुआ वह बिल्कुल नहीं होना चाहिए था. हम पूरी तरह आपके साथ हैं.' अखिलेश ने आश्वासन दिया कि उनकी पार्टी के प्रतिनिधि जल्द ही उनसे मुलाकात करेंगे.

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क्यों शुरू हुआ यह पूरा विवाद?

मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर शंकराचार्य अपनी परंपरागत पालकी यात्रा के साथ संगम स्नान के लिए जा रहे थे. आरोप है कि प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर उनकी पालकी को बीच रास्ते में ही रोक दिया.शंकराचार्य का कहना है कि उन्हें जिस स्थान पर पालकी से उतारा गया वहीं लावारिस छोड़ दिया गया. उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि शंकराचार्य हमेशा पालकी में ही स्नान के लिए जाते रहे हैं. विवाद बढ़ता देख शंकराचार्य ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कड़ा रुख अपनाते हुए कहा 'जब तक प्रशासनिक अधिकारी सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते मैं अपने आश्रम में प्रवेश नहीं करूंगा. मैं प्रण लेता हूं कि हर साल माघ मेले में आऊंगा. लेकिन कभी शिविर में नहीं रहूंगा बल्कि फुटपाथ पर ही अपनी व्यवस्था करूंगा.'

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