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कैराना में ओवैसी की रैली में उमड़ी भारी भीड़, लोग बोले- सपा को मजबूरी में दिया था वोट

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Owaisi Kairana rally: उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कैराना में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की रैली में भारी भीड़ जुटी. रैली में आए लोगों ने कहा कि अब वे मजबूरी में नहीं, बल्कि अपनी पसंद की पार्टी को वोट देंगे.

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Owaisi Kairana rally: उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कैराना में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी की रैली में भारी भीड़ उमड़ी. ओवैसी के मंच पर पहुंचते ही वहां मौजूद लोगों में भारी उत्साह दिखा. इस रैली को देखने के लिए कैराना और आस-पास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे. खास बात यह है कि अभी चुनावों की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है, फिर भी इतनी भारी भीड़ का इकट्ठा होना कई राजनीतिक संकेत दे रहा है. लोगों का कहना है कि अब मुसलमान किसी मजबूरी में वोट नहीं देंगे, बल्कि उन्होंने अपना नेता और अपनी पार्टी चुन ली है. इससे पहले ओवैसी ने रामपुर में भी ऐसी ही एक बड़ी सभा की थी.

ओवैसी को देखने उमड़ी भीड़

कैराना में ओवैसी के कार्यक्रम में हर तरफ लोग ही लोग नजर आ रहे थे. ओवैसी के मंच पर बैठते ही पूरी भीड़ में जबरदस्त उत्साह दिखा. वहां मौजूद लोगों का कहना था कि वे अपने हक की लड़ाई के लिए इस रैली में आए हैं. लोगों का उत्साह बता रहा था कि वे इस कार्यक्रम का कितनी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. एक स्थानीय निवासी ने कहा, "इंशाल्लाह इस बार हमारी पार्टी बहुत मजबूत बनेगी, और इस बार भीड़ सिर्फ देखने नहीं आई है, बल्कि यह भीड़ वोटों में भी बदलेगी."

मजबूरी में दिया था सपा को वोट

जब लोगों से पूछा गया कि कैराना में तो विधायक और सांसद दोनों समाजवादी पार्टी के हैं, तो इस पर एक व्यक्ति ने कहा, "पहले मुसलमानों की मजबूरी थी क्योंकि उनका कोई अपना नेता नहीं था. इसीलिए लोगों ने मजबूरी में अखिलेश भैया को वोट दिया था." लोगों का साफ कहना था कि अब माहौल बदल चुका है. अब मुसलमानों का अपना नेता आ चुका है और अब वे किसी और पार्टी को वोट नहीं देंगे, बल्कि एआईएमआईएम को ही अपना समर्थन देंगे.

अब अपना डंडा और अपना झंडा

रैली में मौजूद लोगों ने साफ कहा कि अब उनका अपना झंडा और अपना डंडा है. एक स्थानीय निवासी अब्दुल रहमान ने बताया कि वे यहां किसी को हराने या जिताने के लिए नहीं आए हैं, बल्कि अपने हक की लड़ाई लड़ने आए हैं. उनका कहना था कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन समाजवादी पार्टी से है और कौन भारतीय जनता पार्टी से. अब वे अपने हक के लिए लड़ेंगे और मैदान में अपने खुद के प्रत्याशी उतारेंगे.