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सीएम योगी को 'भाई' के रिश्ते से जोड़ती महिलाएं... सुरक्षा, सम्मान और सशक्तीकरण से मजबूत होते इस भरोसे के मायने

उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण के दम पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'भाई' वाली छवि महिलाओं के बीच कैसे मजबूत हुई है? जानिए 2027 के विधानसभा चुनाव पर इसके असर का पूरा विश्लेषण.

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Chief Minister Yogi Adityanath
योगी सरकार में चकबंदी व्यवस्था को मिली रफ्तार
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यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. योगी सरकार अपनी तमाम उपलब्धियों का जिक्र कर रही है. लेकिन पिछले करीब 10 साल में अगर सबसे ज्यादा चर्चा किसी मुद्दे की हुई है, तो वह कानून-व्यवस्था है. योगी सरकार की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा की मिसाल कई राज्यों में दी जाती है. एक समय प्रदेश में जो असुरक्षा का माहौल था, उसे बदलने के लिए योगी सरकार ने कई ठोस कदम उठाए हैं. इसी सुधार ने योगी के समर्थन में सबसे बड़ा माहौल भी बनाया है. लेकिन इस समर्थन से भी बढ़कर महिलाओं के मन में एक भरोसा जगा है कि अगर योगी हैं, तो उन्हें संबल है. यही भरोसा योगी की सबसे बड़ी ताकत है, जो चुनाव में भी उनके लिए सबसे मजबूत पहलू बन सकता है.

खास बात यह है कि इस भरोसे की कहानी केवल यूपी तक सीमित नहीं है. हाल ही में केरल की एक लड़की ने योगी को पत्र लिखकर उन्हें अपना भाई बताया था. इसी तरह जापान की एक महिला ने भी योगी को अपना भाई कहा था. यूपी की भी कई महिलाएं उनमें भाई की छवि तलाशती हैं. इस भावना के गहरे मायने हैं. इसे समझने के लिए इस रिश्ते की बारीकी को समझना जरूरी है. आखिर कोई महिला किसी को अपना भाई कब मानती है? महिलाओं के लिए भाई वह रिश्ता है, जिसके साथ वे सबसे ज्यादा सुरक्षित महसूस करती हैं. इसलिए यह भावना अपने आप में बहुत मायने रखती है.

लेकिन इस बदलाव और रिश्ते की कहानी के पीछे एक लंबी यात्रा है. इसे समझने के लिए पिछले कुछ वर्षों में यूपी में हुए बदलावों को भी समझना जरूरी है. एक समय प्रदेश में अपराधियों का बोलबाला था. इसकी सबसे ज्यादा शिकार महिलाएं होती थीं. महिलाओं के साथ अपराध की घटनाएं होती थीं, लेकिन योगी ने सत्ता में आते ही प्रदेश से माफियाराज खत्म करने की मुहिम छेड़ दी.

मंचों से यह संदेश दिया गया कि अगर कोई एक चौराहे पर प्रदेश की बहू-बेटियों का दुपट्टा खींचेगा, तो अगले चौराहे पर उसे यमराज मिलेंगे. सामान्य तौर पर यह भले ही एक भाषण लगे, लेकिन प्रदेश के मुखिया का यह संदेश महिलाओं के लिए ताकत बन जाता है. उन्हें भरोसा मिलता है कि उनका मुखिया उनके साथ खड़ा है. यहीं से योगी की एक भाई वाली छवि गढ़ने की शुरुआत होती है. मिशन शक्ति जैसे अभियान, महिला हेल्पलाइन और पुलिस व्यवस्था के जरिए भी महिलाओं को सुरक्षा संबंधी सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है.

सिर्फ सुरक्षा नहीं, सम्मान और आत्मनिर्भरता भी बने भरोसे की वजह

महिलाओं के सशक्तीकरण का अर्थ केवल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना नहीं है. आर्थिक रूप से मजबूत होना और अपने फैसले खुद लेने की स्थिति में पहुंचना भी उतना ही जरूरी है. स्वयं सहायता समूहों और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की कोशिश इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. इससे ग्रामीण महिलाओं को सामूहिक रूप से काम करने, आय के अवसर तलाशने और परिवार की आर्थिक स्थिति में योगदान देने का मौका मिलता है.

आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, सहायिकाओं और रसोइयों जैसी महिला कर्मियों से जुड़े फैसले भी इस बहस का हिस्सा हैं. योगी सरकार ने न केवल उनके मानदेय में बढ़ोतरी की, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने और रोजगार में स्थायित्व देने की दिशा में भी कोशिश की. इन कदमों ने इन महिलाओं को संबल दिया है.

यह रिश्ता योगी के लिए 2027 में मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है

महिला मतदाता आज चुनावी राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. अलग-अलग राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों को देखें, तो यह बात समझ आती है कि महिलाओं ने कई जगह निर्णायक भूमिका निभाई है. महिला मतदाताओं का समर्थन जीत और हार का अंतर तय करने में अहम साबित हुआ है. ऐसे में योगी आदित्यनाथ के साथ महिलाओं का यह मजबूत होता भावनात्मक रिश्ता उन्हें चुनाव में सीधे तौर पर फायदा पहुंचा सकता है.

महिला मतदाता सुरक्षा और सम्मान के साथ महंगाई, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और सरकारी योजनाओं के लाभ को भी परखती हैं. इन तमाम पहलुओं पर योगी सरकार अपनी उपलब्धियों के साथ आगे दिखाई देती है. ऐसे में महिलाओं के बीच योगी की भाई वाली छवि और उनसे जुड़ा भरोसा 2027 के विधानसभा चुनाव में उनके लिए अहम साबित हो सकता है.

लेखिका  डॉ. मनीषा, दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी इरविन कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. वे समकालीन मुद्दों और समसामयिक विषयों पर लिखती हैं.