UP में मदरसा सर्वे की रिपोर्ट पर सियासत, सपा ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल तो मिला ये जवाब

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सांकेतिक तस्वीरफोटो: मंदार देवधर, इंडिया टुडे

UP Madarsa Survey: उत्तर प्रदेश में मदरसों के सर्वे को लेकर की सियासत एक बार फिर से तेज होती नजर आ रही है. सर्वे का काम प्रदेश में पूरा हो चुका है और हाल ही में आंकड़ों के मुताबिक 60 जिलों में 8496 गैर मान्यता प्राप्त मदरसे मिले हैं. अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र-छात्राओं को बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा उपलब्ध कराना राज्य सरकार का उद्देश्य का दावा है और सभी जनपदों से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद अग्रिम कार्यवाही की जायेगी और जरूरी फैसले लिये जायेंगे.

अहम बिंदु

राज्य सरकार की तरफ से सर्वे कार्य का उद्देश्य अल्पसंख्यक वर्ग को समाज की मुख्य धारा में शामिल करना और विकास की गति से जोड़ना की बात कही गई है. अल्पसंख्यक विभाग ने कम समय में वृहद स्तर पर विभिन्न समस्याओं का सामना करते हुए निर्धारित अवधि में सर्वे कार्य पूरा कराया है. वहीं मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये कि इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखा जाए कि सर्वे कार्य का परिणाम सकारात्मक हो.

गौरतलब है कि 75 जनपदों में से जिलाधिकारी बस्ती, कासगंज, महोबा, औरैया, ललितपुर, चन्दौली, शामली, अलीगढ़, फर्रूखाबाद, चित्रकूट, मथुरा, मऊ, आगरा, अम्बेडकरनगर, फतेहपुर, श्रावस्ती, कौशाम्बी, हमीरपुर, देवरिया, जौनपुर, सहारनपुर, कानपुर नगर, जालौन, उन्नाव, बांदा, शाहजहांपुर, झांसी, लखनऊ, अयोध्या, हरदोई, सम्भल, पीलीभीत, रायबरेली, संतकबीरनगर, गाजियाबाद, इटावा, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, सीतापुर, गोण्डा, फिरोजाबाद, बलिया, बरेली, लखीमपुरखीरी, सोनभद्र, आजमगढ़, सिद्धार्थनगर, कुशीनगर, महराजगंज, बुलन्दशहर, बहराइच, वाराणसी, सुल्तानपुर, कानपुर देहात, बाराबंकी, मेरठ, बदायूं एवं प्रयागराज जनपदों ने सर्वे के बाद अंतिम रिपोर्ट शासन को दे दी है बाकी अन्य जनपदों में भी सर्वे कार्य पूरा हो चुका है, जिसकी रिपोर्ट जल्द भेजी जायेगी.

यूपी तक से बात करते हुए उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र-छात्राओं को बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा उपलब्ध कराना राज्य सरकार का उद्देश्य है और उनके भविष्य के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष किसी भी रूप में खिलवाड़ नहीं करने दिया जायेगा. मदरसों की रिपोर्ट आना शुरू हो गई है और जिन मदरसों में अनियमितताएं गैर कानूनी काम और अवैध रूप से निर्माण या वित्तीय संबंधी कमियां आएंगी तो उस पर कार्रवाई की जाएगी. साथ ही कहा कि सरकार बिना भेदभाव के हर संस्थान पर निगाह रखती है ऐसे में मदरसों को मुख्यधारा से जोड़ना सरकार का मकसद है.

वहीं इस मामले पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि मदरसों का सर्वे जरूरी है ताकि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के मदरसों की तरह तालीम और तरक्की पर तालिबानी ताला नहीं लगे. मदरसों की मशरूमिंग ग्रोथ को रोकने के लिए सर्वे जरूरी, वहां स्कूल खुलना चाहिए, जो मदरसे अपना लेखा-जोखा दें इसमें कोई विवाद नहीं होना चाहिए. जिन मदरसों में गड़बड़झाला है, वहां पर कार्रवाई होनी चाहिए और ऐसी कार्रवाई करना मुस्लिम छात्रों के भविष्य लिए बेहद जरूरी है.

दूसरी तरफ इस पर सवाल करते हुए मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि सरकार के सर्वेक्षण पर सभी मौलानाओं ने अपना सहयोग दिया लेकिन पाठ्यक्रम में बदलाव और गैरकानूनी कामों का हवाला देकर कार्रवाई करने की बात ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि मदरसों का मकसद गरीब छात्रों को मुफ्त में शिक्षा देना है ऐसे में मदरसों के मकसद को बरकरार रखते हुए उन पर शक करना गलत है. यूपी में मदरसे यादव बोर्ड से संबंधित है या फिर सोसाइटी एक्ट के तहत स्वतंत्र तौर पर काम कर रहे हैं ऐसे में इनमे कोई अवैध या गलत काम नहीं होता है.

वहीं समाजवादी पार्टी ने सरकार की मंशा पर एक बार फिर से सवाल खड़े किए हैं. सपा प्रवक्ता फखरूल हसन चांद ने कहा कि बीजेपी अब शिक्षा पर भी पहरा बैठाना चाहती है जो मदरसों के सर्वे के बाद अब कह रही है. कितने जिलों में इतने मदरसे अवैध मिले, जो मदद से बिना सरकारी मदद के चलते हैं क्या वहां की पढ़ाई गलत है, बीजेपी मदरसों के नाम पर राजनीति करते हुए प्रदेश में हिंदू-मुसलमान करना चाहती हैं. इसीलिए यह मदरसों का मुद्दा उछाला जा रहा है.

दूसरी तरफ कांग्रेस ने मदरसों के सर्वे के नतीजे आने के बाद सरकार पर कई सवाल दागे हैं. कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि भाजपा सरकार ने मदरसों का सर्वे कर लिया है तो अब बताए कि क्या शिशु मंदिर, मोंटेसरी और ऐसे अन्य धार्मिक गैर मदद संस्थानों का सर्वे कब होगा, सरकार बताए कि मदरसों में क्या गैरकानूनी पाया गया और अब सरकार क्या इन्हें मदद देगी, शिक्षकों को नौकरी और छात्रों को किताब और ड्रेस देगी, नहीं तो यह सर्वे सिर्फ सांप्रदायिकता को बढ़ाने वाला नहीं कहा जाएगा?

बहरहाल, 15 नवंबर को सरकार पूरे नतीजों के साथ आने वाले समय में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों पर कार्यवाई का रास्ता क्या होगा, ये साफ करेगी लेकिन उसके पहले एक बार फिर से सर्वे के आंकड़ों और सरकार के मकसद को लेकर सियासत तेज होती नजर आती है. जिलाधिकारी के जरिए से शासन स्तर पर सर्वे रिपोर्ट प्राप्त किये जाने की अंतिम तिथि 15 नवम्बर, 2022 तय है.

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