कानपुर: कुरसौली गांव में रहस्यमयी बुखार से अब तक 13 मौतें, लोग ‘पलायन’ को मजबूर

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उत्तर प्रदेश में सरकार की तमाम कोशिश के बावजूद भी वायरल फीवर और डेंगू का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है. प्रदेश में अन्य जिलों की तरह कानपुर का कुरसौली गांव भी इन दिनों वायरल बुखार या डेंगू के कहर से जूझ रहा है. यहां 1 महीने के भीतर रहस्यमयी बुखार से अब तक 13 लोगों की मौतें हो चुकी हैं. गांव के नाबालिक बच्चों से लेकर युवा, बुजुर्ग सब वायरल बुखार या डेंगू से पीड़ित हैं. गांव के ही 30 से ज्यादा लोग अस्पतालों में भर्ती हैं.

मृतकों के परिजन चीख-चीखकर डेंगू से मौत हुई बता रहे हैं, लेकिन जिले के अधिकारी दावा करने में लगे हैं कि जिले में डेंगू से कोई मौत नही हुई है. इस बीच कुरसौली गांव में डेंगू का लोगों में भय फैला है. दावा किया जा रहा है कि गांव के 80 फीसदी लोग अपने घरों पर ताला लगाकर पलायन करने को मजबूर हैं, जिससे गांव की हर गलियों में सन्नाटा छा गया है.

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कुरसौली गांव में लगातार हो रही मौतों से प्रशासन में भी हड़कंप मचा है. घर-घर में आशा डेंगू मरीजों का सर्वे कर रही है. गांव में 24 घंटे का मेडिकल कैम्प लगाया गया है. डॉक्टरों के साथ एम्बुलेंस हर समय मौजूद रहती है डाक्टर दवाएं बाट रहे हैं, लेकिन कैम्प में केवल डॉक्टर ही दिख रहे हैं. जो मरीज बीमार हैं, वे सरकारी से ज्यादा प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं.

जिले के नोडल अधिकारी अनिल गर्ग से लेकर डीएम और सीएमओ गांव का दौरा कर चुके हैं, लेकिन रहस्यमयी बुखार से होने वाले मौत नहीं रुक पा रही है. जिले के अधिकारी यह सफाई देने में ज्यादा लगे हैं कि मौतें डेंगू से नहीं हो रही हैं. जिले के डीएम वीडियो बयान जारी करके डेंगू रोकथाम के लिए सारे दावे कर रहे हैं, लेकिन मौतें कैसे हुई इसकी जानकारी देने से बच रहे हैं.

गांव में ठीक एक महीने पहले 20 अगस्त को सबसे पहले तन्नू नाम की एक बच्ची की मौत हुई थी. उस बच्ची को कई दिनों से बुखार आ रहा था. घरवालों ने उसका डेंगू का इलाज कराया था. इसके बाद 3 सितंबर को शिवराम प्रजापति की मौत से ऐसा सिलसिला शुरू हुआ कि 3 सितबंर से लेकर 18 सितंबर के बीच पंद्रह दिनों में 11 मौतें हो गई. अब प्रशासन गांव के हर घर में डेंगू से बचाव का पर्चा बटवा रहा है. मरने वालों की प्राइवेट जांच में डेंगू पाजटिव रिपोर्ट आई थी, ये बात खुद मेडिकल कैम्प लगाए सरकारी फार्मेसिस्ट मान रहे हैं

आशा बहुएं दावा कर रही है कि उन्हें गांव में डेंगू से 15 मौतों की जानकारी देकर अधिकारियों ने डेंगू मरीज खोजने में लगाया है. फिर भी प्रशासन गांव की मौतों को यह कहकर डेंगू मानने से इंकार कर रहा है कि इनकी जांच मेडिकल कॉलेज में नहीं हुई थी.

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कानपुर के सीएमओ डॉ. नेपाल सिंह ने कहा कि हमारे यहां डेंगू और वायरल से कोई मौत नहीं हुई है.

वहीं, डीएम अलोक तिवारी ने कहा, “जिले में डेंगू का वायरस बढ़ रहा है. ऐसे में सभी को मेडिकल कॉलेज और जिला हॉस्पिटल में जांच करानी चाहिए. गांवों में भी कैम्प लग रहे हैं. अभी तक हमारे जिले में डेंगू से कोई मौत नहीं हुई है.”

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कुरसौली गांव के ग्राम प्रधान अमित सिंह ने कहा, “हमारे गांव में साफ-सफाई हो रही है, लेकिन पता नहीं मौतें क्यों नहीं रुक पा रही है.”

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने फिरोजाबाद में डेंगू मरीजों पर अधिकारियों की लापरवाहियों पर कड़ा एक्शन लिया था, लेकिन कानपुर का पूरा प्रशासन कुरसौली गांव को छोड़िए पूरे जिले में कोई डेंगू से मौत नहीं मान रहा है. ऐसे में सवाल खड़ा होता कि इस गांव में मौतें क्यों और किस बिमारी से हो रही हैं. उन्हें रोकना भी तो प्रशासन की ही जिम्मेदारी है. अगर मृतकों को डेंगू नहीं था तो गांव में पूरा प्रशासन डेंगू रोकने का कार्यक्रम ही क्यों कर रहा है?

(रिपोर्ट: रंजय सिंह / यूपी तक)

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