शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बटुकों को लेकर मचे बवाल पर ब्राह्मण बीजेपी नेता लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कह दिया 'महापाप'
बनारस में भाजपा की ट्रेनिंग से पहले लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने शंकराचार्य के बटुकों के साथ हुई बदसलूकी को महापाप बताया. योगी आदित्यनाथ और बृजेश पाठक के अलग-अलग रुख के बीच क्या है पूरी कहानी? देखिए.

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वाराणसी में भाजपा के प्रशिक्षण कार्यक्रम से पहले, राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों (बटुकों) के साथ माघ मेले में हुई घटना को लेकर बड़ा बयान दिया है. भाजपा के कद्दावर ब्राह्मण नेता लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि किसी के शरीर पर हाथ लगाना अकारण ही "महापाप" है. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बटुकों की शिखा (चोटी) खींचना तो दूर की बात है, किसी को भी शारीरिक रूप से प्रताड़ित (असॉल्ट) करना अपराध है. उन्होंने मांग की कि जिन्होंने नियम विरुद्ध मारपीट की है, उन पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए.
इस विवाद की शुरुआत डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के बयान से हुई थी, जिन्होंने शिखा खींचने को महापाप और महा अपराध बताया था. बृजेश पाठक ने हाल ही में बटुकों को बुलाकर उनकी पूजा भी की, जिसे ब्राह्मण समाज की नाराजगी दूर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
उधर सीएम योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया था. उन्होंने कहा कि "कोई भी नाम लिखने से शंकराचार्य नहीं हो जाता" और हर व्यक्ति को अपनी मर्यादाओं का पालन करना होगा. सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि माघ मेले में सुरक्षा नियमों का पालन करवाना प्रशासन की जिम्मेदारी है ताकि भगदड़ जैसी स्थिति न बने.
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विवाद की पृष्ठभूमि जानिए
यह पूरा विवाद मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज के माघ मेले में शुरू हुआ था. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का आरोप है कि उन्हें स्नान के लिए जाते समय रोका गया और उनके बटुकों के साथ मारपीट की गई तथा उनकी शिखा खींची गई. दूसरी ओर, प्रशासन ने उन्हें 'नकली शंकराचार्य' बताते हुए नोटिस दिया था, क्योंकि उनकी नियुक्ति का मामला अभी कोर्ट में है.










