भीख मांगने वाले बच्चों को शिक्षित कर रहे सिपाही रोहित की पाठशाला के लिए DGP ने भेजा गिफ्ट

भीख मांगने वाले बच्चों को शिक्षित कर रहे सिपाही रोहित की पाठशाला के लिए DGP ने भेजा गिफ्ट
फोटो: संतोष शर्मा

(Uttar Pradesh News) उत्तर प्रदेश की ठांय... ठांय पुलिस के कई किस्से अभी तक आपने ऐसे सुने होंगे जिसने खाकी पर लोगों भरोसे को तोड़ा होगा. पर इस खाकी वर्दी में कुछ युवा ऐसे भी हैं जो न केवल अपने यूनिक काम से समाज की तस्वीर बदल रहे हैं बल्कि लोगों की तारीफों से सम्मानित भी हो रहे हैं. ऐसे ही पुलिस कॉन्स्टेबल हैं राहित यादव (Rohit Yadav). उन्नाव (unnao) में चर्चित हो चुके रोहित यादव का ट्रांसफर जब झांसी हो गया और वे जाने लगे तो बच्चों को उनके प्रति प्रेम मीडिया जगत समेत सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ. फिर सामने आई रोहित के इस अनोखे पहल की कहानी.

फोटो: संतोष शर्मा
अहम बिंदु

पुलिस डिपार्टमेंट में हीरो बन चुके रोहित को हाल ही में प्रदेश के डीजीपी ने बुलाया. डीजीपी डीएस चौहान ने रोहित को डीजीपी मुख्यालय में डीजी कमेंडेशन डिस्क देकर सम्मानित किया. इसके अलावा डीजीपी ने रोहित की पाठशाला में पढ़ रहे बच्चों को किताबें और कलम गिफ्ट दिया.

आइए जानते हैं खाकी वाले गुरु जी कहानी

उन्नाव के कोरारी कला गांव के पंचायत भवन में चल रही उन बच्चों की पाठशाला है जिनके लिए कुछ वक्त पहले तक कोरारी स्टेशन पर ट्रेन के रुकते ही हर आने जाने वाले के आगे पैसों के लिए हाथ फैलाना, खाने का सामान मांगना ही जिंदगी का मकसद था. लेकिन आज उनके हाथ उठते तो हैं, लेकिन सामने खाकी वर्दी में अ से अनार और आ से आम सिखा रहे कांस्टेबल रोहित कुमार यादव की दी किताबो को पकड़ने और कलम थामने के लिए.

बात 4 साल पुरानी है. सितंबर 2018 में जब रोहित यादव जीआरपी उन्नाव में तैनाती के दौरान कानपुर रायबरेली पैसेंजर पर एस्कॉर्ट ड्यूटी दे रहे थे तभी कानपुर से रायबरेली जाने के रास्ते में शाम के वक्त उन्नाव से सटे कुरारी हाल्ट स्टेशन पर कुछ बच्चों को देखा. ये बच्चे आने जाने वालों से पैसे मांगने रहे थे. उन बच्चों में कुछ सयानी हो रही बेटियां भी थीं. कुछ दिन तक तो रोहित इसे देखते रहे. फिर एक दिन ड्यूटी के बाद उसने अपनी बाइक उठाई और सीधे इस हाल्ट स्टेशन पर पहुंच गए.

बच्चों से बात की. बच्चों के मां-बाप से बात की, तो किसी को ना तो स्कूल के बारे में जानकारी थी और ना ही कोई स्कूल जाना चाहता था. अगले दिन रोहित अपने पैसों से एक ब्लैक बोर्ड खरीद कर लाए और बच्चों के लिए टॉफी और बिस्किट. बच्चों को बिस्किट टॉफी देने का लालच दिया तो 5 बच्चे पढ़ने आए. स्टेशन के नीम के पेड़ के नीचे से रोहित की पाठशाला की शुरुआत हो गई. बिस्किट और टॉफी मिलने के लालच ने बच्चों की संख्या बढ़ती गई और जब बच्चे आने लगे तो उनको पढ़ाई भी समझ में आने लगी.

अहम बिंदु

बच्चे बढ़ गए तो ये पाठशाला पंचायत भवन में शिफ्ट हो गई. रोहित यादव ने शुरुआत तो 5 बच्चों से अकेले की थी, लेकिन आज खाकी वाले गुरु जी की पाठशाला में 125 बच्चे पढ़ने आते हैं और अब रोहित के साथ प्रदीप और ज्योति जैसे नौजवान भी इस मुहिम में साथ दे रहे हैं.

अधर रोहित का बीते महीने तबादला हो गया. वह जीआरपी उन्नाव से झांसी जिला पुलिस में तैनात हो गए. रोहित के तबादले की खबर ने इन बच्चों को झकझोर कर रख दिया. ढोल-नगाड़े के साथ गांव वालों और इन बच्चों ने रोहित को विदाई तो दी, लेकिन बच्चे बिलख उठे.

रोहित ने बच्चों के भविष्य को लेकर गांव के ही नौजवानों बसंत और मंगल के साथ प्रकाश पुंज नामक एक संस्था बनवा दी है. बच्चों का पास के ही सरकारी स्कूल में एडमिशन भी दिलवा दिया गया है, लेकिन इनकी पढ़ाई लिखाई का अभी पूरा जिम्मा रोहित और गांव के कुछ नौजवान मिलकर ही उठा रहे हैं.

रोहित की इस मुहिम में स्थानीय लोग साथ हैं. गांव के प्रधान पति सुरेश चंद कुशवाहा कहते हैं कि अब तो वह जब भी किसी अफसर या नेता के पास पंचायत के लिए प्रधान के साथ कुछ कहने जाते हैं तो पहले इस पाठशाला के लिए मांगते हैं.

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