लेटेस्ट न्यूज़

यूपी के इन बड़े एक्सप्रेसवे पर 1 नवंबर से बदल जाएगी गाड़ियों की स्पीड, नया आदेश हो गया जारी

उत्तर प्रदेश में सर्दियों के दौरान एक्सप्रेसवे पर सफर करने वालों के लिए 1 नवंबर से 15 फरवरी तक स्पीड लिमिट कम रखने की तैयारी है.

ADVERTISEMENT

UPTak
social share
Google CTA

उत्तर प्रदेश में सर्दियों के दौरान एक्सप्रेसवे पर गाड़ी चलाने वालों को अपनी रफ्तार कम रखनी होगी. कोहरे के कारण होने वाले सड़क हादसों को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) ने विंटर सेफ्टी गाइडलाइंस जारी की हैं. इसके तहत 1 नवंबर से 15 फरवरी तक एक्सप्रेसवे पर स्पीड लिमिट कम रखी जाएगी. नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी.

व्यवस्था आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गोरखपुर लिंक और निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे पर लागू करने की तैयारी है. UPEIDA ने अधिकारियों को 31 अक्टूबर तक सुरक्षा से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं. कोहरे के दौरान कम विजिबिलिटी यानी सड़क पर कम दिखाई देने की स्थिति में वाहन चालकों को ज्यादा सावधानी बरतनी होगी.

कार और भारी वाहनों की स्पीड कितनी रहेगी?

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, UPEIDA के विंटर सेफ्टी प्रोटोकॉल के तहत कोहरे के मौसम में वाहनों की रफ्तार कम की जाएगी. आगरा-लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हल्के मोटर वाहनों की स्पीड लिमिट 100 किलोमीटर प्रति घंटे से घटाकर 80 किलोमीटर प्रति घंटे की जाएगी. भारी वाहनों के लिए सीमा 80 से घटाकर 60 किलोमीटर प्रति घंटे होगी.

ये आंकड़े आगरा-लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के लिए दिए गए हैं. इस साल बुंदेलखंड, गोरखपुर लिंक और गंगा एक्सप्रेसवे पर भी इसी तरह कम स्पीड लिमिट लागू करने की तैयारी है. 

पांच एक्सप्रेसवे पर कोहरे से निपटने की तैयारी

सर्दियों में कोहरे के कारण सड़क पर आगे चल रहे वाहन को देखना मुश्किल हो जाता है. कई बार अचानक ब्रेक लगाने या समय पर वाहन नजर नहीं आने से एक के बाद एक कई गाड़ियां टकरा जाती हैं. इसे रोकने के लिए UPEIDA पांच एक्सप्रेसवे पर विशेष सुरक्षा इंतजाम करेगा.

आगरा-लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हर साल घना कोहरा छाता है. इन पर पहले भी कई वाहनों के आपस में टकराने की घटनाएं हुई हैं. बुंदेलखंड और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर भी कुछ हिस्सों में कोहरे की समस्या रहती है.

गंगा एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों को चालू किए जाने की उम्मीद को देखते हुए वहां भी पहले से सुरक्षा व्यवस्था करने की तैयारी है. प्राधिकरण का मकसद है कि कम विजिबिलिटी के दौरान वाहन चालकों को समय रहते खतरे की जानकारी मिल सके.

पेट्रोलिंग टीम, एंबुलेंस और क्रैश पेट्रोल वाहन बढ़ेंगे

कोहरे के दौरान एक्सप्रेसवे पर निगरानी बढ़ाई जाएगी. इसके लिए फॉग पेट्रोलिंग टीमें तैनात की जाएंगी. जरूरत पड़ने पर हादसे वाली जगह तक जल्दी पहुंचने के लिए क्रैश पेट्रोल वाहनों और एंबुलेंस की उपलब्धता भी मजबूत की जाएगी. हाईवे सेफ्टी टीमें भी सक्रिय रहेंगी.

सड़क पर वाहन चालकों को दिशा और खतरे की जानकारी देने के लिए रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड लगाए जाएंगे. ब्लिंकर और फॉग लाइट की भी व्यवस्था की जाएगी. इनका मकसद कम रोशनी और घने कोहरे में सड़क की स्थिति समझने में मदद करना है.

VMS और सोशल मीडिया से मिलेगी कोहरे की जानकारी

UPEIDA वाहन चालकों को अलर्ट करने के लिए अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल करेगा. एक्सप्रेसवे पर लगे वैरिएबल मैसेज साइन (VMS) और पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए कोहरे, स्पीड लिमिट और रास्ते में बदलाव की जानकारी दी जाएगी. सोशल मीडिया के माध्यम से भी यात्रियों को अलर्ट किया जाएगा.

टोल प्लाजा पर नियमों के बारे में लोगों को जागरूक करने के साथ स्पीड लिमिट का पालन कराने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे. प्राधिकरण के मुताबिक, कोहरे के दौरान तय गति सीमा का उल्लंघन करने वाले चालकों के चालान काटे जा सकते हैं. नियम तोड़ने वाले चालकों को ब्लैकलिस्ट करने की भी योजना है.

एक्सप्रेसवे पर सफर करने वालों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

1 नवंबर से 15 फरवरी के बीच एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वालों को अपनी यात्रा का समय तय करते हुए कोहरे की स्थिति का ध्यान रखना चाहिए. घना कोहरा होने पर केवल निर्धारित स्पीड लिमिट के भीतर गाड़ी चलाना ही काफी नहीं है, बल्कि दृश्यता के हिसाब से रफ्तार और कम रखनी पड़ सकती है

वाहन चालकों को आगे चल रही गाड़ी से पर्याप्त दूरी बनाए रखनी चाहिए और अचानक ब्रेक लगाने से बचना चाहिए. फॉग लाइट का सही इस्तेमाल करना चाहिए. एक्सप्रेसवे पर लगे साइन बोर्ड और VMS पर मिलने वाले निर्देशों का पालन करना भी जरूरी होगा.

UPEIDA की नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य सर्दियों में कम विजिबिलिटी के कारण होने वाले हादसों को रोकना है. इसके लिए स्पीड लिमिट घटाने के साथ पेट्रोलिंग, एंबुलेंस, चेतावनी संकेत और नियमों के पालन पर जोर दिया जाएगा.