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Shadashtak Yog 2026: सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश से बना बेहद अशुभ षडाष्टक योग, अगले 30 दिन इन 4 राशियों को रहना होगा सतर्क

Shadashtak Yog 2026: सूर्य के कर्क राशि में गोचर के बाद सूर्य और राहु के बीच षडाष्टक योग बना है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस अशुभ योग का असर कुछ राशियों के जातकों पर पड़ सकता है. जानिए किन राशियों को रहना होगा सतर्क और कौन से उपाय दे सकते हैं राहत.

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ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है और उनका राशि परिवर्तन काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. 16 जुलाई को सूर्य ने मिथुन राशि से निकलकर चंद्रमा की राशि कर्क में प्रवेश किया है. सूर्य के इस गोचर के साथ ही कई ग्रहों की विशेष स्थिति बनी है, जिसमें सूर्य और कुंभ राशि में मौजूद राहु के बीच षडाष्टक योग का निर्माण हुआ है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार यह योग तनाव, बाधाओं और परेशानियों का कारण बन सकता है.
 

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सूर्य के कर्क राशि में आने के बाद राहु के साथ षडाष्टक संबंध बनने से कई राशियों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है. इसके अलावा सूर्य और केतु के बीच द्विद्वादश योग तथा सूर्य-गुरु की युति भी बन रही है. ग्रहों की यह स्थिति अगले एक महीने तक कुछ लोगों के लिए मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानी और कार्यक्षेत्र में उतार-चढ़ाव ला सकती है.
 

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षडाष्टक योग का असर वृषभ राशि के जातकों पर चुनौतीपूर्ण रह सकता है. नौकरी या कारोबार में सहकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मतभेद होने की संभावना है. इस समय बातचीत में संयम रखना बेहद जरूरी होगा, क्योंकि छोटी सी गलती भी नुकसान पहुंचा सकती है. पैसों के लेन-देन और निवेश के मामलों में जल्दबाजी से बचें.
 

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मिथुन राशि वालों के लिए सूर्य का गोचर द्वितीय भाव में होने जा रहा है. राहु के साथ बने अशुभ योग के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां परेशान कर सकती हैं. आंखों और पेट से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज न करें. इसके अलावा अचानक आने वाले खर्च आपकी आर्थिक योजना को प्रभावित कर सकते हैं. इस दौरान विरोधियों और छिपे हुए शत्रुओं से सावधान रहने की जरूरत है.
 

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तुला राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र में तनाव का सामना करना पड़ सकता है. काम का बोझ बढ़ सकता है और आपकी मेहनत का पूरा श्रेय आपको न मिलने की स्थिति बन सकती है. इस समय नौकरी बदलने जैसे बड़े फैसले लेने से बचें. वहीं, वैवाहिक जीवन में भी छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव बढ़ सकता है, इसलिए धैर्य बनाए रखें.
 

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कुंभ राशि में राहु की मौजूदगी के कारण सूर्य के साथ षडाष्टक योग का सबसे ज्यादा प्रभाव इसी राशि पर पड़ सकता है. इस दौरान मन में बेचैनी, भ्रम और अनजाना डर बना रह सकता है. किसी भी तरह की जोखिम भरी यात्रा से बचें और वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें, क्योंकि चोट या दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है.
 

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ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए नियमित रूप से भगवान शिव की पूजा करें. शिवलिंग पर तांबे के पात्र से जल अर्पित करें और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें. इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का पाठ भी शुभ फल देने वाला माना जाता है.
 

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रोज सुबह उगते सूर्य को जल अर्पित करें और उसमें थोड़ा कुमकुम मिलाएं. इस दौरान "ॐ घृणि सूर्याय नमः" मंत्र का जाप करना लाभकारी माना जाता है. शनिवार या बुधवार को जरूरतमंदों को काले तिल, उड़द की दाल या सात प्रकार के अनाज का दान करें. साथ ही पक्षियों को नियमित रूप से बाजरा या अनाज खिलाने से भी ग्रह दोषों की शांति की मान्यता है.