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बलिया के सुरहा ताल की देखें ये खूबसूरत तस्वीरें, इसके चारों ओर बिखरी हरियाली और रंग बिरंगी पक्षियां बना देंगी आपका दिन

Surah Tal: उत्तर प्रदेश के बलिया स्थित सुरहा ताल को भारत की 100वीं रामसर साइट का दर्जा मिला है. यह वेटलैंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हरियाली और हजारों स्थानीय व प्रवासी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है. जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य के रूप में पहचाना जाने वाला यह क्षेत्र पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र है. तस्वीरों में देखिए सुरहा ताल की खूबसूरती, शांत जल, रंग-बिरंगे पक्षी और प्रकृति के अद्भुत नजारे.

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उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सुरहा ताल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण वेटलैंड  के रूप में मान्यता मिली है. इसे रामसर साइट का दर्जा प्रदान किया गया है, जिसके साथ यह भारत का 100वां रामसर वेटलैंड बन गया है. इस मान्यता के बाद सुरहा ताल वैश्विक पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर चुका है.
 

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सुरहा ताल को भारत की 100वीं रामसर साइट घोषित किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी जताई. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उत्तर प्रदेश के बलिया स्थित जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) को यह सम्मान मिलना गर्व की बात है. पीएम ने कहा कि यह आर्द्रभूमि पक्षियों की विविधता से भरपूर है और यहां बड़ी संख्या में स्थानीय व प्रवासी पक्षी आते हैं. उन्होंने इसे पर्यावरण संरक्षण के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया.
 

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सुरहा ताल अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है. यहां सालभर कई तरह के स्थानीय पक्षी दिखाई देते हैं, जबकि सर्दियों में साइबेरिया समेत कई देशों से हजारों प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं. यही वजह है कि यह क्षेत्र पक्षी प्रेमियों और प्रकृति से जुड़ाव रखने वाले लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र माना गया है.
 

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बसंतपुर के पास स्थित सुरहा ताल बलिया शहर से करीब 17 किलोमीटर की दूरी पर है. यह क्षेत्र पहले से जय प्रकाश नारायण पक्षी विहार के नाम से जाना जाता है. वर्ष 1991 में इसे पक्षी अभयारण्य का दर्जा मिला था. गंगा और सरयू नदी के खादर क्षेत्र में स्थित यह ताल प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है.
 

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सुरहा ताल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है. यहां दूर-दूर तक फैला पानी, चारों ओर हरियाली और बड़ी संख्या में पक्षी देखने को मिलते हैं. यहां स्थानीय पक्षियों के साथ-साथ सर्दियों में साइबेरिया समेत कई देशों से आने वाले प्रवासी पक्षी भी पहुंचते हैं. सुबह और शाम के समय सुरहा ताल का नजारा बेहद खूबसूरत दिखाई देता है. यही कारण है कि सुरहा ताल को देश के प्रमुख और महत्वपूर्ण वेटलैंड क्षेत्रों में गिना जाता है.
 

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रामसर साइट का दर्जा मिलने के बाद सुरहा ताल में पर्यटन गतिविधियों को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है. अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने से यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है. इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और कारोबार के नए अवसर भी मिलेंगे, जिसका सीधा फायदा पूरे क्षेत्र को होगा.
 

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सुरहा ताल करीब 24.9 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जो बारिश के मौसम में बढ़कर लगभग 42 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच जाता है. रामसर कन्वेंशन की शुरुआत वर्ष 1971 में आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए की गई थी. अब भारत के 100 वेटलैंड इस सूची में शामिल हैं और सुरहा ताल इस ऐतिहासिक सूची का 100वां सदस्य बन गया है.

(इस खबर को यूपी Tak के साथ इंटर्नशिप कर रही मान्या पाण्डेय ने लिखा है.)