Asaduddin Owaisi Bahraich UP: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. अब इस चुनावी माहौल में एआईएमआईएम (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी की भी आधिकारिक एंट्री हो गई है. ओवैसी ने अपने यूपी चुनावी कैंपेन का आगाज बहराइच जिले की मुस्लिम बाहुल्य मटेरा विधानसभा सीट से किया है. असदुद्दीन ओवैसी मटेरा के शंकरपुर चौराहा बाजार में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे. इस रैली के जरिए ओवैसी का सीधा लक्ष्य न सिर्फ सत्ताधारी बीजेपी को घेरना है, बल्कि विपक्षी गठबंधन और खासकर समाजवादी पार्टी के मजबूत मुस्लिम वोट बैंक में अपनी जगह बनाना भी है.
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सपा का मजबूत गढ़ है मटेरा
बहराइच की मटेरा विधानसभा सीट राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद अहम है. क्योंकि यहां 50 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं और यह लगातार 3 बार से समाजवादी पार्टी का अभेद्य किला बनी हुई है. साल 2012 और 2017 में इस सीट से सपा के यासिर शाह ने जीत दर्ज की थी, जबकि 2022 में उनकी पत्नी मरिया अली शाह ने बीजेपी को हराकर इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा है. अब इसी सपा के गढ़ में एआईएमआईएम ने अपने यूपी प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली को उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतार दिया है. अपनी चुनावी तैयारियों पर पूरा भरोसा जताते हुए शौकत अली ने कहा कि, 'लगभग हमारी तैयारी मुकम्मल है और इंशाल्लाह अल्लाह ने चाहा तो बहराइच जनपद की यह अब तक की एक ऐतिहासिक रैली होगी.'
शौकत अली ने दिया विवादित बयान
मटेरा में अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने के लिए एआईएमआईएम लगातार आक्रामक रणनीति अपना रही है. इस रणनीति के तहत प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने राजा सुहेलदेव को लेकर एक बड़ा विवादित बयान दे दिया है. ऐतिहासिक तथ्यों पर सवाल उठाते हुए शौकत अली ने कहा कि, 'यह मेरा मानना है कि राजा सुहेलदेव राजा नहीं थे, एक दिया हुआ नाम है राजा का, और अगर वह राजा थे तो उनकी रिहाइशगाह भी होनी चाहिए थी.' उन्होंने ऐतिहासिक इमारतों का उदाहरण देते हुए आगे कहा कि, 'कुतुब मीनार को कुतुबुद्दीन ऐबक ने बनवाया, शाहजहां ने ताज को बनवाया, तो सारी निशानियां तो हैं लेकिन राजा सुहेलदेव की कोई ऐसी निशानी या अवशेष नजर नहीं आ रहे हैं.'
गाजी मियां की मजार पर जाने की नहीं मिली अनुमति
बहराइच में ओवैसी के दौरे से पहले यह चर्चा जोरों पर थी कि वे अपनी रैली के साथ-साथ प्रसिद्ध गाजी मियां की मजार पर भी जियारत के लिए जाएंगे, लेकिन प्रशासन की तरफ से उन्हें मजार पर जाने की इजाजत नहीं दी गई है. ओवैसी को मजार पर जाने की अनुमति न मिलने से राजनीतिक विश्लेषकों का सारा ध्यान उनकी चुनावी रैली और भाषणों पर केंद्रित हो गया है. क्योंकि अब ये देखना होगा की ओवैसी बीजेपी सरकार पर ज्यादा हमलावर होते हैं या फिर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हैं. बहरहाल, ओवैसी के इस कदम से यह साफ हो गया है कि आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम पूरे दमखम के साथ उतरकर स्थापित राजनीतिक दलों के समीकरण बिगाड़ने की तैयारी में जुट चुकी है.
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