संत कबीर नगर जिले की खलीलाबाद विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. यूपी Tak की खास रिपोर्ट 'यूपी किसका' में इस सीट के इतिहास और वर्तमान समीकरणों का विश्लेषण किया गया है. आपको बता दें कि खलीलाबाद वही सीट है जहां कभी डॉ. मोहम्मद अय्यूब की पीस पार्टी का खाता खुला था, जो AIMIM से पहले उत्तर प्रदेश में मुस्लिम राजनीति का प्रमुख चेहरा थी. 2022 में भाजपा के अंकुर राज तिवारी ने यहां जीत दर्ज की. इससे पहले 2017 में भाजपा के दिग्विजय नारायण और 2012 में पीस पार्टी के मोहम्मद अय्यूब विधायक रहे. भाजपा यहां हर बार अपना उम्मीदवार बदलने का प्रयोग करती रही है.
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2027 के लिए दावेदारी
वर्तमान विधायक अंकुर राज तिवारी का दावा है कि उन्होंने जनता से किए गए 80-90% वादे पूरे कर दिए हैं और विकास के मुद्दे पर वे फिर से जीतेंगे. समाजवादी पार्टी का मानना है कि पिछली बार हार का अंतर केवल 12,000 वोट था और इस बार समीकरण उनके पक्ष में हैं. सपा कार्यकर्ता क्षेत्र में काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं.
जातीय और धार्मिक समीकरण
खलीलाबाद एक मुस्लिम बहुल सीट मानी जाती है (अनुमानित 1,40,000 मुस्लिम मतदाता).
अन्य प्रमुख मतदाओं में निषाद (17,000), जाटव (13,000), ब्राह्मण (40,000), कुर्मी (40,000), यादव (30,000) और वैश्य (30,000) शामिल हैं.
सपा मुस्लिम-यादव (M-Y) समीकरण पर भरोसा कर रही है, वहीं भाजपा हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण और ओबीसी मतों को साधने की कोशिश में है.
क्या मुकाबला त्रिकोणीय होगा?
स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, पिछले चुनाव में हाशिए पर रहने वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) इस बार फिर से सक्रिय हो रही है. यदि बसपा अपने पुराने दलित-ब्राह्मण समीकरण को साध लेती है, तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है.
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