उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) की हाई-प्रोफाइल लखनऊ खंड स्नातक सीट के नतीजों ने सूबे की सियासत में बड़ा भूचाल ला दिया है. एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार कांति सिंह ने बीजेपी के अवनीश पटेल को शिकस्त देकर इस सीट पर भगवा किले को ढहा दिया है. वहीं दूसरी तरफ इस चुनाव का एक ऐसा परिणाम सामने आया है जिसकी चर्चा पूरे सोशल मीडिया पर हो रही है.
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देश के जाने-माने ज्योतिषाचार्य और भविष्यवक्ता आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा की पत्नी स्मिता मिश्रा भी इस चुनावी मैदान में उतरी थीं जिन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा है. स्थिति यह रही कि दो साल तक जमीन पर पसीना बहाने और तमाम बड़े संगठनों का समर्थन होने के बावजूद उन्हें 300 वोट भी नसीब नहीं हो सके, जिसके बाद अब लोग आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा की भविष्यवाणियों पर ही मजे लेते हुए उन्हें जमकर ट्रोल कर रहे हैं.
बड़े-बड़े विज्ञापन, दो साल की मेहनत फिर भी 300 वोट नहीं
स्मिता मिश्रा ने इस चुनाव को जीतने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी थी. उन्होंने पिछले दो सालों से जमीन पर उतरकर तैयारी की थी. उन्होंने 37 तहसीलों के स्कूल-कॉलेजों में जाकर शिक्षकों, छात्रों और स्नातकों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया था. अखबारों में पूरे-पूरे पन्ने के महंगे विज्ञापन छपवाए गए. चुनाव अभियान के दौरान उन्हें करणी सेना, स्थानीय ब्रह्म समाज और नवयुवक दल जैसे कई ताकतवर संगठनों का खुला समर्थन भी मिला था. बावजूद इसके यह तमाम तामझाम और जनसंपर्क वोटों के बक्से में तब्दील नहीं हो सका और वह 300 वोटों के आंकड़े को भी नहीं छू पाईं.
ट्रोलर्स के निशाने पर आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा, स्मिता ने दी सफाई
टीवी स्क्रीन पर बैठकर पूरी दुनिया को संकट से उबरने के उपाय और कामयाबी के टोटके बताने वाले आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा अब सोशल मीडिया यूजर्स के मुख्य निशाने पर आ गए हैं. लोग चुटकी ले रहे हैं कि 'जो दूसरों को सफलता का अचूक मंत्र देते हैं, वे अपनी पत्नी को चुनाव नहीं जितवा सके?' इन तीखे तंजों के बीच खुद स्मिता मिश्रा ने मैदान में आकर सफाई दी है. उन्होंने कहा कि 'मैंने चुनाव लड़ने से पहले अपने पति से अपनी कुंडली या चुनावी भविष्य को लेकर कोई चर्चा नहीं की थी. हमारे घर बड़े-बड़े राजनेता आते हैं और आचार्य जी के बताए उपायों से सफलता भी पाते हैं. मैं कोई सत्ता सुख भोगने के लिए नहीं बल्कि जनसेवा और परोपकार के भाव से उतरी थी.'
हार का ठीकरा धांधली पर, लगाए गंभीर आरोप
स्मिता मिश्रा ने अपनी हार की वजह चुनावी व्यवस्था और धांधली को बताया है. उनका गंभीर दावा है कि दो साल की मेहनत के बाद जिन मतदाताओं को उन्होंने जोड़ा था, उनके नाम जानबूझकर मतदाता सूची में शामिल ही नहीं किए गए. इसके अलावा उन्होंने पोलिंग बूथों पर अपने चुनावी एजेंटों को अंदर न बैठने देने और चुनाव में अंधाधुंध धनबल के इस्तेमाल का भी बड़ा आरोप लगाया है.
कौन हैं स्मिता मिश्रा?
स्मिता का मायका उन्नाव जिले के कुरारी गांव में है और ससुराल बाराबंकी के इकरा गांव में है. उनके दादा शंभू रतन शुक्ला एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रमुख सहयोगियों में गिने जाते थे. उनके पिता रामसुंदर नाथ शुक्ला एक सम्मानित पुलिस अफसर थे जिन्हें सेवाकाल के दौरान 26 मेडल मिले थे. उन्हें आजीवन वर्दी पहनकर परेड में शामिल होने का विशेष सम्मान भी प्राप्त था. स्मिता की दो बेटियां कनाडा में और एक बेटा गुरुग्राम में रहता है.
अब 2027 के विधानसभा चुनाव पर नजर
एमएलसी चुनाव की इस करारी हार से स्मिता मिश्रा के तेवर बिल्कुल भी ठंडे नहीं पड़े हैं. उन्होंने ऐलान किया है कि वह निराश होने वाली नहीं हैं. उन्होंने साल 2014 में 'नवयुवक दल' नाम से अपनी पार्टी का गठन किया था और अब उनका अगला बड़ा लक्ष्य 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव है. स्मिता ने दावा किया है कि उनकी पार्टी 2027 के रण में पूरे दमखम के साथ उतरेगी और कम से कम 50 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेगी.
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