गोरखपुर में बीजेपी के ध्रुव त्रिपाठी की जीत के बाद भी कैसे हीरो बन गए निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव?

सुषमा पांडेय

• 09:31 AM • 29 Oct 2026

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक एमएलसी चुनाव में निर्दलीय राजीव यादव महज 307 वोटों से हार गए. उन्होंने मतगणना में धांधली के आरोप लगाकर कोर्ट और चुनाव आयोग जाने की बात कही. उनके प्रदर्शन से भाजपा और सपा दोनों के चुनावी समीकरण प्रभावित हुए.

Rajeev Yadav

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'हम हार गए हैं... शिक्षक हार गए हैं.' यह शब्द उस उम्मीदवार के थे जिसने गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक खंड निर्वाचन एमएलसी चुनाव में पूरे सियासी गणित को हिलाकर रख दिया. चर्चाएं किसी और की चल रही थीं. लेकिन जब मतगणना शुरू हुई तो एक ऐसा चेहरा उभरा जिसने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी  से लेकर मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी दोनों के पसीने छुड़ा दिए.

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हम बात कर रहे हैं निर्दलीय प्रत्याशी राजीव कुमार यादव की जिन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रभाव वाले इस क्षेत्र में बीजेपी के दिग्गज उम्मीदवार ध्रुव त्रिपाठी को अंतिम राउंड तक सांसें थाम देने वाले मुकाबले में रोके रखा. केवल 307 वोटों के बेहद मामूली अंतर से चुनाव हारने के बाद राजीव यादव ने प्रशासन और मतगणना प्रक्रिया पर धांधली के गंभीर आरोप लगाए हैं और अदालत तथा निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाने की घोषणा की है.

267 से 307 वोटों का अंतर: अंतिम समय तक हांफती रही बीजेपी

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक खंड सीट पूर्वांचल का एक बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र मानी जाती है. यहां से बीजेपी समर्थित उम्मीदवार ध्रुव त्रिपाठी ने अपनी जीत का चौका तो लगा दिया.लेकिन यह जीत उनके लिए आसान नहीं रही.

जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ रही थी, राजीव यादव लगातार बढ़त बनाए हुए थे. अंतिम नतीजों से कुछ घंटे पहले ही राजीव यादव ने गड़बड़ी का अंदेशा जाहिर किया था. नतीजा आने के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि 'बड़े पैमाने पर धांधली की गई है. पूरा प्रशासनिक अमला इसमें शामिल था. मेरे नाम के आगे लिखे '1' (प्रथम वरीयता) को '4' बना दिया गया और प्रतिद्वंद्वी के आगे '1' दर्ज कर दिया गया. 162 से अधिक वोटों में हेरफेर की गई है. हम चुप नहीं बैठेंगे, कोर्ट और चुनाव आयोग जाएंगे.'

कौन हैं राजीव यादव?

राजीव यादव मूल रूप से बलिया के रहने वाले हैं और वर्तमान में कुशीनगर जिले के पडरौना स्थित उदित नारायण इंटर कॉलेज में साल 2008 से भूगोल के लेक्चरर हैं. वह उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री भी हैं.

शिक्षकों की राजनीति में राजीव यादव अटेवा गुट का बड़ा और लोकप्रिय चेहरा माने जाते हैं. शिक्षक पेंशन और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर शिक्षकों को एकजुट करने में उनकी बड़ी भूमिका रही है. पारंपरिक रूप से इस सीट पर शर्मा गुट का दबदबा रहा है जिसका फायदा ध्रुव त्रिपाठी को मिलता रहा. लेकिन इस बार 'अटेवा बनाम शर्मा गुट' की इस लड़ाई में राजीव यादव ने शिक्षक राजनीति का भूगोल ही बदलकर रख दिया.

सपा और बीजेपी दोनों की गणित बिगड़ी

इस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने संजयन त्रिपाठी को मैदान में उतारा था.संजयन त्रिपाठी (जो पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर थे) इस बार पूरी तरह रेस से बाहर होकर तीसरे स्थान पर खिसक गएय

सियासी गलियारों में चर्चा है कि सपा द्वारा अपने पूर्व प्रत्याशी कमलेश यादव का टिकट काटकर संजय त्रिपाठी को दिए जाने से यादव मतदाता नाराज थे. सपा का एक बड़ा कैडर और शिक्षक वोटर राजीव यादव के पक्ष में लामबंद हो गया जिससे सपा की पूरी रणनीति धराशायी हो गई. वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के तीन बार के एमएलसी ध्रुव त्रिपाठी को भी राजीव यादव की मजबूत घेराबंदी के कारण द्वितीय वरीयता के वोटों की गिनती तक अपनी सांसें थामनी पड़ीं.

2027 की सियासत और सपा में जाने की अटकलों पर जवाब

राजीव यादव के इस धमाकेदार प्रदर्शन के बाद यह अटकलें तेज हो गई थीं कि क्या अखिलेश यादव 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए गोरखपुर-बस्ती-गोरखपुर मंडल में राजीव यादव पर दांव लगा सकते हैं?

हालांकि जब मीडिया ने उनसे किसी राजनीतिक दल से जुड़ने या भविष्य की राजनीति पर सवाल पूछा तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में मना कर दिया. राजीव यादव ने कहा 'हम न तो बीजेपी की राजनीति करना चाहते हैं और न ही सपा की. हम सिर्फ 'शिक्षा और शिक्षकों' की राजनीति कर रहे हैं. किसी राजनीतिक दल के झंडे के नीचे जाने से हमारा मूल उद्देश्य और शिक्षकों के मुद्दे प्रभावित होंगे.'

भले ही चुनाव की आधिकारिक ट्रॉफी ध्रुव त्रिपाठी के नाम रही हो लेकिन इस एमएलसी चुनाव में राजीव यादव ने एक निर्दलीय शिक्षक नेता के रूप में जो राजनीतिक ताकत दिखाई है, उसने पूर्वांचल की भावी राजनीति में नए समीकरण जरूर दर्ज कर दिए हैं.

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