उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अयोध्या की राजनीति को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडेय ने बीजेपी और योगी सरकार पर निशाना साधा है. एक इंटरव्यू में उन्होंने अयोध्या में बीजेपी की हार की वजह विकास कार्यों के दौरान किसानों और व्यापारियों के साथ हुआ कथित अन्याय बताया. उनका आरोप है कि अयोध्या में जमीन अधिग्रहण और मुआवजे के नाम पर गरीब किसानों को नुकसान हुआ, जबकि बड़े प्रॉपर्टी डीलरों को फायदा पहुंचाया गया.
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पवन पांडेय ने कहा कि बीजेपी ने राम मंदिर और अयोध्या के नाम पर देशभर में राजनीति की, लेकिन लोकसभा चुनाव में अयोध्या की जनता ने ही पार्टी को नकार दिया. उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार अयोध्या आए, वहां पूजा-अर्चना की, इसके बावजूद फैजाबाद लोकसभा सीट पर बीजेपी को हार का सामना क्यों करना पड़ा?
जमीन के नाम पर किसानों को ठगने का लगाया आरोप
पवन पांडेय ने अयोध्या में जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर एक उदाहरण दिया. उनका आरोप है कि पहले आवास विकास और विकास प्राधिकरण की ओर से गांव के किसानों को जमीन अधिग्रहण का नोटिस दिया गया. किसानों को बताया गया कि उनकी जमीन सरकार ले सकती है और इसके बदले उन्हें करीब 4 लाख रुपये प्रति बिस्वा मिलेंगे.
पवन पांडेय के मुताबिक, इस नोटिस के बाद मुंबई और गुजरात से आए बड़े प्रॉपर्टी डीलरों ने गांव में अपने लोगों के जरिए किसानों से संपर्क किया. उन्होंने किसानों को सरकारी मुआवजे से कुछ ज्यादा यानी 5 लाख रुपये प्रति बिस्वा देने की बात कही. ज्यादा पैसे मिलने की उम्मीद में किसानों ने अपनी जमीन बेच दी.
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रॉपर्टी डीलरों के जमीन खरीदने के बाद अधिग्रहण का नोटिस खत्म हो गया. जिन जमीनों को करीब 5 लाख रुपये प्रति बिस्वा के हिसाब से खरीदा गया था, उन्हें बाद में 1 करोड़ 80 लाख रुपये प्रति बिस्वा तक बेचा जाने लगा. पवन पांडेय ने इसे किसानों, अधिकारियों और बीजेपी नेताओं के बीच कथित गठजोड़ का नतीजा बताया.
एयरपोर्ट और रामपथ के लिए मुआवजे पर भी उठाए सवाल
पवन पांडेय ने अयोध्या एयरपोर्ट के निर्माण के लिए जमीन देने वाले किसानों का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि गंजा, कुटिया और धर्मपुर गांव के किसानों की जमीन एयरपोर्ट के लिए ली गई. उनके मुताबिक, जिन जमीनों की कीमत 2 से ढाई करोड़ रुपये थी, उनके मालिकों को 5 से 10 लाख रुपये तक मुआवजा मिला.
उन्होंने रामपथ निर्माण के दौरान दुकानदारों और मकान मालिकों को मिले मुआवजे पर भी सवाल उठाए. पवन पांडेय का आरोप है कि कई व्यापारियों के तीन-चार पीढ़ियों पुराने मकान और दुकानें टूट गईं, लेकिन उन्हें सिर्फ एक-दो लाख रुपये का मुआवजा दिया गया. उन्होंने दावा किया कि मुआवजे के बंटवारे में भी अधिकारियों ने कमीशनखोरी की. उनका कहना था कि कई व्यापारियों को इतना नुकसान हुआ कि वे उसे सहन नहीं कर पाए.
मिल्कीपुर और एमएलसी चुनाव में प्रशासन पर लगाए आरोप
इंटरव्यू में पवन पांडेय ने मिल्कीपुर उपचुनाव का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वहां चुनाव जनता ने नहीं, बल्कि डीएम, एसपी और दूसरे प्रशासनिक अधिकारियों ने लड़ा था. उनका दावा है कि अगर निष्पक्ष चुनाव होता तो समाजवादी पार्टी जीतती.
गोरखपुर के एमएलसी चुनाव का उदाहरण देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि वहां भी अधिकारियों ने समाजवादी पार्टी और उसके समर्थित उम्मीदवार को हराने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी. उन्होंने बनारस की दोनों एमएलसी सीटों का जिक्र करते हुए कहा कि अलग-अलग जगहों पर प्रशासन का रवैया अलग दिखाई दिया. उन्होंने इसे दिल्ली और लखनऊ के बीच कथित राजनीतिक खींचतान से भी जोड़कर देखा.
लखनऊ के विकास का श्रेय अखिलेश यादव को दिया
पवन पांडेय ने लखनऊ के विकास कार्यों को लेकर भी योगी सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि लखनऊ मेट्रो की शुरुआत अखिलेश यादव की सरकार में हुई थी. उनके मुताबिक, मेट्रो का शिलान्यास और उद्घाटन भी अखिलेश यादव ने ही किया था. उन्होंने 1090, पुलिस मुख्यालय, स्टेडियम और दूसरे प्रोजेक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि इनका निर्माण समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान हुआ.
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि हर सरकार अपने समय में काम करती है. लेकिन अयोध्या के विकास का श्रेय देने के बजाय वहां जमीन और मुआवजे से जुड़े कथित भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए.
फैजाबाद सीट पर क्या रहा था चुनाव परिणाम?
पवन पांडेय के आरोपों की राजनीतिक पृष्ठभूमि समझने के लिए 2024 का लोकसभा चुनाव भी है. फैजाबाद लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद ने बीजेपी के लल्लू सिंह को 54,567 वोटों से हराया था. अवधेश प्रसाद को 5,54,289 वोट मिले थे, जबकि लल्लू सिंह को 4,99,722 वोट मिले थे.
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